Mami ko Pata Kar Choda

मामी को पटा कर चोदा

ये स्टोरी ६ महीने पहले की है. जब मैं अपनी मामी के साथ दिल्ली टूर पर था और वहां ऐसा हो गया जो मैं बहुत दिन से चाह रहा था. पहले आपको अपनी मामी के बारे मे बताता हू. उनका नाम करीना है, कलर थोडा सा सावंला है, गांड बहुत कटली लगती है. उनके बूब्स ३४सी है और गांड ३८ है.

वो चलती है तो उनकी गांड देखकर मेरा लंड पेंट फाड़ कर बाहर आने को करता है. अब आपको स्टोरी बताता हु. मैं हमेशा उनके आसपास रहता हु और उनके साथ टाइम स्पेंड करना पसंद करता हु. एक बार पता चला, वो दिल्ली जा रही थी अपनी फ्रेंड के साथ. तो मैंने भी जुगाड़ किया और उनके साथ जाने का प्रोग्राम बनाया. हम गाडी में घर से निकले.

और उनकी फ्रेंड के घर पहुचे, तो पता चला कि उनकी फ्रेंड की तबियत अचानक से ख़राब हो गयी है और वो नहीं जा पाएंगी. ये सुनते ही मामी उदास हो गयी. बट मैं तो ख़ुशी से पागल हो उठा. फिर मामी प्रोग्राम कैंसिल करने लगी. बट मैंने उनको बहुत रिक्वेस्ट किया और मना लिया. मैंने उनके साथ टाइम सेपंड करने का मन था, इसलिए उनको मना रहा था और मैं उनको हमेशा से ही चोदना चाहता था और इस मौके को गवाना नहीं चाहता था.

उनके मानने से मैं बहुत खुश था और हम दोनों दिल्ली चल दिए. २ बजे तक हम दिल्ली पहुच गये और वहां जाके हमने होटल में एक रूम लिया. पहले मामी फ्रेश हुई और फिर मैं भी फ्रेश हो गया. फिर मामी ने एक साड़ी पहन ली, जिसमे वो बहुत मस्त लग रही थी.

फिर हमने कुछ खाया और शौपिंग करने चले गये. मैं तो उनके पीछे-पीछे ही चल रहा था बिकाउज मुझे तो उनकी गांड देखनी थी. फिर शाम को हमने मूवी देखि और हम होटल वापस आ गये. फिर हम दोनों ने डिनर किया और वापस कमरे में आ गये. मैं और मामी एक बेड पर लेते हुए मूवी देख रहे थे.

मेरा तो लंड भी खड़ा हुआ जा रहा था. पहली बार, मामी मेरे इतने करीब थी और वो भी अकेले. मेरा तो मन हो रहा था, कि अभी चोद दू साली को और पूरी रात चोदता रहू. यही सोच-सोच कर मेरा बुरा हाल था. फिर कब नीद आ गयी, पता ही नहीं चला और रात को करीब ३ बजे नीद खुली. तो देखा कि मामी मेरे पास सोयी हुई थी.

मामी की साड़ी का पल्लू हटा था और उनके ब्रेस्ट साफ़ दिखाई दे रहे थे. जब भी वो साँस लेती, तो उनके ३४ के मम्मे ऊपर – नीचे होते. मेरी तो नीद ही उड़ गयी. मैं उनके बूब्स ही देखता रह गया. ४ बजे गये, फिर उन्होंने करवट बदली और उनकी साड़ी पैरो से काफी ऊपर हो गयी और उनके आधे से ज्यादा पैर दिख रहे थे. मेरा तो बुरा हाल था.

मैंने डरते हुए उनके पैर पर अपना पैर लगाया और रगड़ने लगा. तभी मामी बोली – क्या कर रहे हो और मैं डर गया. सोने का नाटक करने लगा. फिर थोड़ी देर बाद मैं दुबारा उठा और वाशरूम जाकर मुठ मारी. मामी की चूची और गांड को याद करके. और मैंने सोच लिया था कि कुछ भी करके कल उनको चोदुंगा.

बट, माय बेडलक नेक्स्ट डे भी ऐसे ही निकल गया बिकाउज दोस्तों, घरवालो से भी डर था. कहीं मामी गुस्सा हो जाती, तो घर पर एंट्री नहीं मिलती. फिर तीसरे दिन की सुबह में मामी वाशरूम में नहाने गयी, तो मैं गेट के नीचे से उनको देखने लगा. ज्यादा कुछ तो नहीं दिखा; बट शायद मम्मी को पता चला गया था कि मैं उनको देख रहा हु.

फिर मामी बाहर आके बोली – क्या कर रहा था. मैं डर गया और बोला – कुछ नहीं. उस दिन हम मार्केट गये और १-२ जगह और भी घुमे. जब हम होटल पहुचे तो पास ही १ मार्किट में कुछ और शौपिंग के लिए गये, क्युकी नेक्स्ट सुबह हमें घर वापस आना था. मेरा तो मूड बहुत ख़राब था.

बिकाउज ३ दिन हो गये थे और कुछ हुआ नहीं था और तो और सुबह की बात से डर भी लग रहा था, कहीं मामी घर पर कुछ ना बोल दे. हमें घूमते-घूमते और शौपिंग करते-करते ८ बज गये और हमने वहीँ डिनर किया और होटल की तरफ चल दिया. मामी और मैं दोनों ही काफी टायर्ड थे.

तभी रास्ते में बारिश हो गयी और हम थोड़े गीले हो गये. जल्दी-जल्दी होटल पहुचे; बट तब तक हम काफी गीले हो चुके थे. मामी की साड़ी गीली होने से वो सेक्सबम लग रही थी. मेरा तो फिर से खड़ा हो गया था. मैंने सोचा, मामी को रिक्वेस्ट करता हु कि थोड़ी देर और बारिश में नहा लेता हु.

चूत तो मिली नहीं, कम से कम थोड़ा मजा आँखों को ही मिल जाए. मैंने मामी को रिक्वेस्ट किया. वो मान गयी और हम होटल की रूफ पर आ गये और वहां हमने ३० मिनट तक नहाया. मामी पूरी गीली हो गयी थी. उनके कपड़े गीले होके उनकी बॉडी से चिपक चुके थे.

उनकी चूची थोड़ी- थोड़ी दिखने लगी थी और उनका पेट भी देख रहा था. उनकी गांड बड़ी मस्त लग रही थी. फिर हम दोनों को बहुत ठण्ड लगने लगी और हम नीचे आ गये. हमने आकर चेंज किया और लेट गये. बट उनको बहुत ठण्ड लग रही थी. वो ठण्ड से काँप रही थी. मैंने सोचा, नीचे जाकर कुछ कॉफ़ी ले आता हु. लेकिन नीचे गया, तो रेस्टोरेंट बंद हो चूका था.

मैंने सोचा क्या करू? सामने वाइन शॉप थी. वहां से सबसे छोटी रम की बोटल ले ली और जुगाड़ करके १ गिलास गरम पानी ले लिया. फिर मैं रूम में पंहुचा, तो मामी अभी भी ठण्ड से काँप रही थी. मैंने पानी में रम डाली, तो शायद वो थोड़ी ज्यादा हो गयी और मैंने मामी को बोला, कि दवाई है.

जल्दी से पी जाओ. उन्होंने थोड़ी सी पी, तो बोली कडवी है. मैंने उनको इंसिस्ट किया, तो उन्होंने वो पी ली. ३० मिनट बाद, वो थोड़ी नार्मल हुई; बट नशा भी हो गया उन्हें. फिर, मैं उनके साथ कम्बल में लेट गया और वो बोली – राहुल, एक बात पुछु? मैं बोला – हाँ. उन्होंने कहा – सच बताएगा? मैंने कहा – हाँ.

उन्होंने बोला – कि तू सुबह बाथरूम में मुझे देख रहा था, हे ना. मैं कुछ नहीं बोला, तो वो बोली – सच बता. नहीं तो घर पर बता दूंगी. मैंने कहा – हाँ मामी. आप को ही देख रहा था. सॉरी. प्लीज किसी को बताना मत. फिर बोली – तुझे मैं अच्छी लगती हु? मैंने कहा – हाँ. फिर उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया और फिर मैंने सोचा, अच्छा मौका है. मैंने उनके गले पर किस करनी शुरू कर दी.

तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और मैंने और किस की. मैंने उनके गले पर किस की और फिर उनके फॉरहेड पर और फिर उनके रेड-रेड होठो पर फिर उन्होंने अपने मुह को खोल दिया. मैं उनके नीचे वाले होठ को अपने होठो के बीच दबाकर चूसने लगा. वो भी साथ देने लगी थी. फिर मैंने उनके ऊपर वाले होठ को चूसा और उसके अपनी जीभ उनके मुह में घुसा दी.

१५ मिनट तक, मैं उनकी जीभ को चूसता रहा. वो पूरी तरह से मदहोश हो गयी. मैंने अब उनको लिटा दिया और उनके पैरो पर किस करने लगा. मैंने उनकी साडी को ऊपर करना शुरू किया और किस करने लगा और किस करते-करते उनकी थाई तक आ गया.अब उन्होंने मुझे रोक दिया और फिर उनको लिप्स पर किस करने लगा. मैं उनकी गर्दन भी चूम रहा था.

अब मैंने उनकी छाती पर से साड़ी हटा दी थी और उनके ब्लाउज के ऊपर से उनकी मोटी- मोटी चुचियो को किस कर रहा था. फिर मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खोल दिए और उनके ब्लैक ब्रा से ढके हुए चुचे मेरे सामने थे. मैंने उनकी ब्रा के ऊपर किस किया और उनकी ब्रा को उतार दिया. अब उनके मोटे-मोटे चुचे मेरे सामने थे, जिन्हें मैं देखता ही रह गया. कबसे इन्हें देखना और चुसना चाहता था, लेकिन आज मौका मिला है. उनके गोल-गोल मोटे-मोटे चूचो को किस किया.

फिर उनके ऊपर गोल-गोल जीभ घुमाई और फिर उनके ब्राउन निप्पल को मुह में लेके चूसने लगा. १० मिनट तक चूसने के बाद, उनके निप्पल रेड हो गये और बीच में काट भी लेता था उनके निप्पल को. फिर दोनों चूचो को हाथमे लेके खूब दबाया और उनका पूरा रस निकाल लिया.

मदहोश हो गयी तो और अहहहहः म्मम्मम्मम .. दबा और जोर से .. दबा ना ..पूरा रस निकाल दे. अहहः उम्म्मम्म कर रही थी. फिर मामी बहुत तड़पने लगी और बोली – अब सहन नहीं हो रहा है, फिर मैंने उनकी साड़ी को उतार दिया और पेटीकोट के नीचे उन्होंने ब्लैक पेंटी पहनी थी. वो गीली हो गयी थी. मैंने पेंटी के ऊपर से उन्हें किस किया, तो उन्होंने मेरे सिर को अपने हाथ से पकड़ लिया और और उसे अपनी चूत में दबाने लगी.

फिर मैंने पेंटी के साइड से अपनी जीभ को उनकी चूत से टच किया. वो पागल हो गयी अहहहहाह ऊओअओअओअओआओ ..करने लगी. उन्होंने अपनी पेंटी उतार दी और बोली – प्लीज अब नहीं रहा जा रहा. मैंने उनके दोनों पैरो को खोला और उनकी चूत को अच्छे से चाटा और चूसा, जब तक उनका ऑर्गन नहीं आया.

तब तक फिर, वो झड़ गयी और फिर मैंने उनको दोबारा गरम किया और फिर अपने कपडे उतारे और अपना ७ इंच का लंड उनके हाथ में दे दिया. लंड हाथ में लेके वो बोली – वाह, तेरा तो काफी बड़ा है. मजा आ जाएगा. फिर उन्होंने लंड को किस किया और अपने मुह में लेके चूसा. उन्होंने मेरे लंड को अपने थूक से पूरा गीला कर दिया और फिर मामी बोली – अब जल्दी से इसे डाल दे.

फिर मैंने उन्हें बेड के कोने पर किया और अपने लंड को उनकी चूत पर लगाया और जोर से झटका मारा. मेरा थोडा लंड उनकी चूत के अन्दर चले गया. वो चिल्लाई – मर्र्रर्र्र्रर्र्र ग्यीईईईइ. हहहहः . अहहहहः . ऊऊऊओ फिर ३-४ झटके में मैने अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया. मैं जोर-जोर से मस्ती में उनकी चुदाई कर रहा था.

पुरे कमरे में पच पच प्छ्हह्ह्ह्ह की आवाज़े आ रही थी. उनकी सिसकिया मुझे और भी ज्यादा उतेजित कर रही थी – अहहहहः चोद और जोर से चोद .अगगागागा . हम्मम्मम्म .चोद्द्द्दद्द्द ..अहहाह .चोद्दद्द साले .. फाड़ दे अपनी मामी की चूत . अहहहः .और अन्दर डाल ..ओहोहोहोहो . पूरा घुसा दे. अहहहः . .ह्म्म्मम्म्म्म.

मैं भी अपनी फुल स्पीड में मामी को चोद रहा था. मैं उनके पूछा, कि कहाँ लेना है मेरा माल. उन्होंने मुझे किस करते हुए कहा – मेरी चूत में ही छोड़ दे मेरे राजाआआआ. उनका शरीर अकड़ने लगा था और मेरा भी माल बाहर आने को मेरे लंड के मुहाने पर टक्कर मार रहा था. फिर, १० मिनट बाद में हम दोनों एक साथ ही झड़ गये.

झड़ने के बाद भी, मैंने अपना लंड मामी की चूत से बाहर नहीं निकाला और उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ से दबाना शुरू कर दिया और मेरे रस की एक – एक बूंद अपनी चूत में झड़ ली. मेरा लंड सुकड़ कर काफी छोटा हो चूका था. अब मैंने अपने लंड को उनकी चूत से बाहर निकला और हम नंगे ही एकदूसरे की बाहों में लेते रहे और एक दुसरे के शरीर की गर्मी को महसूस करते रहे. हमे कब नीद आ गयी, पता ही नहीं चला.

सुबह नीद खुली, तो ९ बजे थे. मामी वाशरूम में थी और जब बाहर आई तो थोडा गुस्सा लग रही थी. वो बाहर आते ही बोली – ये क्या किया तुमने रात को? मैंने सॉरी बोला और कहाँ सॉरी मामी गलती से हो गया. फिर वो मुस्कुरायी और बोली ऐसी गलती कभी- कभी अच्छी लगती है बस.

राज नहीं. फिर क्या था मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और बोला – जानेमन मुझे भी अपने साथ नहला लिया होता. उन्होंने मुझे एक प्यारी चपत लगाते हुए “थैंक्स” बोला और बोली बहुत दिनों बाद इतना मज़ा आया. तेरे मामा तो कुछ भी नहीं करते.

फिर वो बोली – चल अब जल्दी से तैयार हो जा, चलना है वापस. मैंने कहा – नहीं, एक बार और करना है. वो बोली – अभी नहीं, बनारस जाकर. फिर मैं तैयार हुआ और हम वापस घर निकल गये.