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Gaanv Ki Choot

गाँव की चूत

एक बार की बात है, मेरे मामा अपने किसी दोस्त की शादी में जा रहे थे, उन्होंने मुझसे भी साथ चलने को कहा। क्योंकि मैं जानता था की शादी में लड़कियाँ पटाना आसान होता है, मैं मामा के साथ गया। मामा के दोस्त के घर पहुँचते ही मुझे एक लड़की दिखाई पड़ी, वो इतनी सुन्दर थी कि अगर एक बार अपने मुँह से लंड बोल देती तो मेरा लंड झर-झर के झरना हो जाता।
मैंने सोच लिया था कि इसकी चूत तो किसी भी हाल में फाड़ कर रहूँगा चाहे जो हो जाये। उसकी मादक मुस्कान देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था। पहले दिन तो उससे मेरी कोई बात नहीं हुई, मेरी हिम्मत ही नहीं पड़ी उससे बात करने की, पर दूसरे दिन, मुझे याद है, मैंने वहाँ बैठे एक लड़के से पानी माँगा।
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Jaipur ki Chori Chud Gayi

जयपुर की छोरी चुद गयी

मेरा नाम राजेश है, यह घटना मेरे साथ सच में हुई है। यह मेरी पहली कहानी है जो मैं यहाँ लिख रहा हूँ अपने पहले प्यार का अनुभव !
धैर्य से पढ़िए, यह आपके लण्ड और बुर से पानी निकाल देगी।
मैं एक लड़की के साथ बहुत दिनों से ऑनलाइन बात कर रहा था, उसका नाम स्वीटी है। हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे, मैं चेन्नई में पढाई कर रहा था और वह जयपुर में। वह मुझसे हर बात कर लेती थी और मैं उसके साथ।
एक दिन मैंने उसके सामने अपने प्यार का इज़हार किया और उसके लिए मेरे दिल में जो भी था मैंने उसे सब सच बता दिया। वह भी मुझ से प्यार करती थी और उसने मुझे हाँ कह दिया।
स्वीटी :
स्वीटी बहुत ही सुंदर लड़की है, उसकी तनाकृति 34-27-36 है, कद 5’6″, गोरा रंग, मस्त होंठ, अच्छे नयन-नक्श, नए जमाने के घर की आधुनिक बेटी थी। उसे टीशर्ट पहनना पसंद है और टीशर्ट में उसके वक्ष बहुत ही सुंदर दिखते हैं, मानो वो उस शर्ट को फाड़ कर बाहर आना चाहते हों। उसकी कमर को कोई अगर देख ले तो बस देखता ही रह जायेगा। बस मस्त माल है।
मैं : मैं भी दिखने में अच्छा हूँ, मेरा कद 5’7″ है, मुझे बॉडी बिल्डिंग का शौक है बचपन से, अपने ६ पैक्स पर मुझे बहुत नाज़ है और मेरा लंड 7.5″ लंबा और 3″ मोटा है।
हमारी मुलाक़ात और प्यार :
हम दोनों की परीक्षाएँ खत्म होने के बाद हमने मिलने की योजना बनाई और मैं उसे मिलने जयपुर गया। वह मुझे लेने बस स्टैंड आई। जब मैंने उसे पहचाना तो मैं उसे देखता ही रह गया। वह मुझे किसी परी जैसी लग रही थी।
उस दिन हम दोनों बहुत घूमे और बहुत मस्ती की।
रात में हम दोनों एक होटल में कमरा लेकर रुक गए। कमरा बहुत सुन्दर था और दिल की आकृति का बेडरूम था। दोनों खाना खाकर बातें करते करते सो गए।
बीच रात को मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि स्वीटी मुझे कसकर पकड़ कर सो रही थी और उसके वक्ष मेरी छाती से दब रहे थे, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैंने भी उससे कस कर पकड़ लिया, उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। तब मुझे लगा कि वह नींद में है और मैं उसके स्तनों को अपनी छाती से दबाने लगा।
मैं धीरे-धीरे उसके पेट को सहलाने लगा और अपना हाथ उसके वक्ष पर फिराने लगा, उसने तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं की। कमरे में नाइट बल्ब जला हुआ था, मैंने उसके होटों को देखा तो मेरा मन उन्हें चूमने को करने लगा। मैंने हिम्मत करके उसके होटों को अपने होटों से छूने के लिए अपना मुँह उसके मुँह से छुआ ही था कि उसने भी मुझसे चुम्बन करना शुरु कर दिया।
मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और हम बहुत देर तक चूमते रहे। मैं उसकी जीभ चूसने लगा और वो मेरे होटों को चूसे जा रही थी।
उसे चूमते हुए मैं उसके स्तन भी दबा रहा था और पेट को भी सहला रहा था। फिर मैं धीरे धीरे अपना हाथ उसकी स्कर्ट में डालने लगा तो उसने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं कुछ देर रुक गया फिर उसका टॉप उतारने लगा। उसने मुझे नहीं रोका। अब उसके चूचे मेरे सामने उसकी ब्रा में थे, मैं उन्हें देख कर पागल हो रहा था और उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। वह भी धीरे-धीरे मस्त होने लगी।
मेरा मन उसके चूचों को चूसने को कर रहा था तो मैं उसकी ब्रा खोलने के लिए अपने हाथ उसकी कमर पर ले गया लेकिन उसकी ब्रा में बहुत सारे हुक थे जिसमें आखरी हुक नहीं खुल रहा था, तो स्वीटी ने यहाँ मेरी मदद की और जैसे ही उसकी ब्रा खुली, उसने मुझे कस कर गले लगा लिया।
फिर मैंने उसे लेटाया और उसके स्तनों के चारों ओर चुम्बन करने लगा, मैं उसे तड़पाना चाहता था थोड़ी देर !
और जब उसके चुचूक कड़े हो गए तो मैंने अचानक से उन्हें बहुत तेज तेज चूसना शुरु कर दिया और उन्हें हल्के-हल्के काटने लगा।
स्वीटी भी बहुत मस्त हो चुकी थी और मेरे सर के बालों को पकड़ रही थी, उन्हें खींच रही थी। करीब दस मिनट तक मैं उन्हें चूसता रहा, मेरे लण्ड का बहुत बुरा हाल हो चुका था, वो पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाहता था तो मैंने स्वीटी का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। उसने मेरे लण्ड को कस के पकड़ लिया और उसे दबाने लगी।
अब मैंने अपना हाथ फिर से स्वीटी की स्कर्ट में डालना चाहा तो स्वीटी ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया लेकिन इस बार उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। मैंने अपना हाथ फिर उसकी स्कर्ट में घुसा दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसे सहलाने लगा, उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और उसकी योनि में ऊँगली डालने लगा। स्वीटी तो बिल्कुल जैसे पागल ही हो गई, वो मस्त होकर सिसकारियाँ लेने लगी और इधर उधर तड़पने लगी।
अब मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैंने धीरे धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए, फ़िर उसकी स्कर्ट और पैंटी एक ही झटके में उतार दी, उसकी योनि देख कर मेरे तन बदन काम वासना से जलने लगा। उसकी योनि पर बहुत हल्के-हल्के सुनहरे बाल थे। फिर में एक भूखे शेर की तरह उसकी चूत को चूसने लगा, उसमें अपनी जीभ डालने लगा, चाटने लगा, काटने लगा, स्वीटी को अपनी जीभ से चोदने लगा। मैंने अपनी आँखें ऊपर करके देखा तो स्वीटी अपने हाथों से अपने स्तन कसकर दबा रही थी और अपनी योनि को उठा उठा कर मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रही थी।
थोड़ी देर बाद स्वीटी फिर से झड़ गई…..
मैंने उसका सारा पानी चाट लिया और उसकी बुर को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता था, मैंने अपना पूरा खड़ा लण्ड उसकी बूर में डालना चाहा पर जा ही नहीं रहा था, मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं स्वीटी दर्द से चिल्लाने न लगे, आखिर मैंने कस कर एक धक्का मारा और मेरा एक इन्च लण्ड उसकी बूर में चला गया, स्वीटी बहुत जोर से रोने लगी और चिल्लाने लगी, और लण्ड को बाहर निकालने के लिए कहने लगी।
मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होटों को चूसने लगा ताकि वो आवाज़ न करे।
थोड़ी देर मैं उसे चूमता रहा। जब मुझे लगा कि उसका दर्द कम हो गया है तो मैंने एक जोर का झटका फिर से लगा दिया। इस बार तीन इन्च लण्ड उसकी बुर में चला गया।
स्वीटी चिल्लाना चाहती थी पर मैंने उसके होटों को अपने होटों में ले रखा था। इसी तरह 3-4 धक्के लगाने के बाद मेरा पूरा का पूरा लण्ड स्वीटी की बुर में चला गया और उसका बहुत बुरा हाल हो गया, वो बहुत रो रही थी…
फिर कुछ देर के बाद मैंने हिलना शुरु किया और लण्ड आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद स्वीटी भी मेरा साथ देने लगी और उसे भी बहुत मज़ा आने लगा….
15 मिनट तक मैंने स्वीटी को बहुत प्यार से चोदा, उसके बाद मैं एक जानवर बन चुका था और पूरे जोर-शोर से उसकी चुदाई कर रहा था। स्वीटी भी बहुत मस्ती से मुझसे चुद रही थी और बहुत आनन्द ले रही थी, अपनी गांड उठा उठा के मेरे लण्ड को अपनी बुर से खा रही थी।
इस रफ़्तार से मैंने उसे 15 मिनट तक और चोदा इस दौरान स्वीटी तीन बार झड़ चुकी थी। जब मुझे लगा कि मैं आने वाला हूँ तो मैंने स्वीटी से कहा- मैं आ रहा हूँ !
स्वीटी ने भी अपनी गति बढ़ा दी और हम दोनों साथ साथ झड़ गए और मैं थक कर स्वीटी के वक्ष पर सर रख कर उसके उपर लेट गया।
उस रात स्वीटी और मैंने चार बार प्यार किया…
हम लोग आज भी बहुत सेक्स करते हैं…
मुझे और बहुत सी गर्लफ्रेंड मिली और मैंने सबकी बुर की प्यास अपने लण्ड के पानी सी बुझाई।
अगर इस कहानी को पढ़ कर आपके लौड़ों और बुरों से पानी निकला हो या तो मुझे जरुर बताइए।

Uncle ka Dheela Lund aur Uska Ras

अंकल का ढीला लन्ड़ और उसका रस

मेरे घर वाले जब कोटा में जब सेटल हुए तो मुझे पापा ने होस्टल में डाल दिया। होस्टल में रह कर मैंने एस.सी. की पढ़ाई पूरी की थी। मेरे होस्टल के पास ही पापा के एक दोस्त रहते थे, पापा ने उन्हें मेरा गार्जियन बना दिया था। वो अंकल करीब 54 55 साल के थे। उनका बिजनेस बहुत फ़ैला हुआ था। एक तो उन्हें बिजनेस सम्हालना और फ़िर टूर पर जाना… उन्हें घर के लिये समय ही नहीं मिलता था। आन्टी नहीं रही थी… बस उनके दो लड़के थे, जो बिजनेस में उनका साथ देते थे। घर पर वो अकेले रहते थे।
उन्होने घर की एक चाबी मुझे भी दे रखी थी। मैं कम्प्यूटर के लिये रोज़ शाम को वहां जाती थी… अंकल कभी मिलते…कभी नहीं मिलते थे… उस दिन मैं जब घर गई तो अंकल ड्रिंक कर रहे थे और कुछ काम कर रहे थे… मैं रोज़ की तरह कम्प्यूटर पर अपने ईमेल चेक करने लगी…
आज अंकल मुझे घूर रहे थे… मुझे भी अहसास हुआ कि आज …अंकल कुछ मूड में हैं…
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Paise bhi Mile aur Chut bhi

पैसे भी मिले और चूत भी

कहानी मेरी और एक 28 साल की विवाहिता स्त्री की है जिसका नाम कामया है, यह काल्पनिक नाम है।
कामया एक 28 साल सुन्दर मनमोहक, गोरी, हाइट 5’6″ के लगभग, पतली सी पर उसके वक्ष मस्त सुडौल 32 साइज़ के हैं।कमर तो पूछो मत इतनी नाहुक कि कोई देखे तो पागल हो जाए, चूतड़ वो मोटे मोटे…
उसका पति एक कम्पनी का मालिक है।मैं हमेशा एक नेटवर्किंग साईट पे लखनऊ बॉय के नाम से कमेन्ट करता था कि किसी भाभी, आंटी, डिवोर्सी, विधवा को सेक्स या अच्छी फ्रेंडशिप की जरूरत हो तो लखनऊ बॉय से संपर्क करें।और आगे मैं मेरा मोबाइल नंबर डालता था।शुरुआत में मुझे बहुत दूर से मिस कॉल या मैसेज आते थे भाभी और लड़कियों के। Continue reading

Bhabhi ko Garmi di

भाभी को गर्मी दी

मेरा नाम अनिल है, मैं आपके सामने अपनी पहली कहानी पेश करने जा रहा हूँ। सबसे पहले मैं गुरूजी का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मेरी कहानी को समझा और अन्तर्वासना के माध्यम से आप लोगों तक पहुँचाया और उन फड़कती हुई चूतों को भी मेरा सलाम जो हमेशा किसी लण्ड की तलाश में रहती हैं। चूतें हमेशा चुदने के लिए होती हैं !

दोस्तो, बात उस वक्त की है जब मेरे बड़े भाई की नई-नई शादी हुई थी। जब मैंने पहली बार भाभी को देखा तो मैं उन्हें देखता ही रह गया। मेरी भाभी का फीगर 36-28-36 है। वो बहुत ज्यादा सैक्सी लगती हैं। लेकिन कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई। सभी मेहमान शादी के एक-दो दिन तक सभी जा चुके थे। लेकिन मेरी चचेरी बहन नहीं गई थी।

भाभी और मैं आपस में बातें करने लगे। ऐसे ही एक महीना निकल गया। मैं नहीं जानता था कि भाभी भी मुझे पहले दिन से ही पसन्द करने लगी थी। यह भाभी ने मुझे बाद में बताया था।
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