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मेरी मकानमालकिन और उसकी सहेली

मेरी मकानमालकिन और उसकी सहेली मुझसे चुदवाती थी । दोनों को एकदम सेफ जगह और मुफ्त का मर्द मिल गया था और मुझे किराए में रियायत।
मकानमालकिन मुझे खाना खिलाने लगी और पहले किरायेदार से पेईंग गेस्ट बनाया फिर बहाने से छूने लगी,सटने लगी, खाना परोसते समय इतना झुकती कि गाल से गाल छू जाता, फिर एक दिन मेरा लंड सहला दिया। फिर मैं उसकी चुम्मी लेने लगा, चूचियां दबाने लगा। फिर मैं साडी के ऊपर से ही उसकी बूर मसल दिया। अब वो मेरे नहाने के वक्त बिना दरवाजे के बाथरूम के सामने बैठकर बर्तन मांजने लगती और मैं अंडरवियर के अन्दर साबुन लगाता तो कहती कि सारा देह खोलकर साफ़ करते हो उसको भी खोलकर अच्छे से साफ़ किया करो. फिर मैं खड़े लंड को कच्छी से निकालकर देर तक झाग मलता और वो इत्मीनान से देखकर आह भरती। फिर मैं लपककर उसे पीछे से पकड़ लेता, उसके बोबे दबाता और उसकी पेटीकोट के अन्दर हाथ डालकर बुर को मसल देता। मेरे गीले बदन से वह आधी भींग जाती। फिर मैं उसके सामने सड़का मारता या उसे बाथरूम में खींचकर उससे सड़का मरवाता उसके बाद वो नहाती। फिर वो रात में धीरे से मेरे बिस्तर में आने लगी और पत्नी की तरह हाथ पाँव दबाने लगी मालिश करने लगी और चुदवाने लगी।
उसकी सहेली भी मुझे देखकर ओंठ चाटने लगी। और धीरे धीरे सटने सटाने लगी। एक दिन मैं बेफिक्र होकर रोज की तरह से अपने लंड में तेल लगा रहा था। मकानमालकिन खुद चाय लेकर आने की बजाय जानबूझकर उसी समय सहेली से चाय भिजवाई। उसकी सहेली चाय रखते हुए बोली- अकेले क्यों इतनी मेहनत करते है किसी की मदद ले लिया कीजिये न । मैं चुनक गया और वह इतना कहकर भागने लगी । फिर उसी हालत में मैंने उसको दबोच लिया। और लंड उसकी कूल्हों के बिच दबाते हुए कहा- आओ मदद करो न। मैंने उसके बोबे मसल दिए और सलवार के अन्दर हाथ डालकर उसकी ……. क्या …….? हाँ, उसकी बुर्र्र्र्र्र भी मसल दिया। बस फिर दिन से शुरू हो गया …..मेरे तो मजे ही मजे थे। दोनों एक साथ मेरे बिस्तर में आने लगीं ……..