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Chachi ki Maalish kar ke choda

चाची की मालिश कर के चोदा

दोस्तों मेरा अड्मिशन MBA मैं हो गया था और मैं अपने CHACHA के साथ रह कर MBA कर रहा था. घर मैं चाहा चाची ही थे. उनकी एक बेटी थी जो बाहर रह के पड़ाई कर रही थी. चाही की उमर करीब 45 साल थी पर वो एक दूं टिप टॉप रहती थी. वो एक दूं स्लिम ट्रिम थी और वो इतनी उमर की होंगी ये पता नही चलता था. वो देखने मैं बहुत ही खूबसूरत थी और चाचा एक दूं काले और मूटे थे. चाचा Govt Dept मैं बहुत आक्ची पोज़िशन पे थे और अक्सर तौर पर बाहर जया करते थे.
चाची से मेरी बहुत आक्ची बनती थी और मैं उनसे काफ़ी बातें शेर करा करता था. वो तो मेरी कॉलेज की गफ़ से भी मिल चुकी थी. इन शॉर्ट चाची काफ़ी फ्रॅंक थी मेरे साथ. मुझे ये भी पता था के चाहा चाची को सेक्षुयली सॅटिस्फाइड नही कर पाते थे . और ये सब मैने एक रात चाची को चाचा से कहते हुए सुना था. वो केन रही थी के तुम्हारा सारा ध्यान केवल पैसे कमाने मे है और लास्ट टाइम हुँने कब प्यार करा था क्या याद है.
मैने वहाँ जिम जाय्न कर लिया था और दो ही महीनो मैं बॉडी अची ख़ासी बनने लगी थी. उन दीनो मैने चाची के बिहेवियर मैं काफ़ी बदलाओ देखा. वो अक्सर मेरे काफ़ी करीब आ के बात करा करती थी और मेरे को टच करने की बी अक्सर कोशिश करा करती थी. मैं उन सब बातो को इग्नोर करा करता था. उस वक़्त मैने चाची के बारे मैं कुछ भी ग़लत नही सोचा था. पर एक दिन सब ग़लत हो गया जो मैने कभी सोचा भी नही था.
चाचा को 15 दिन के लिए तौर पे जाना पद गया. घर पे चाची और मैं ही अकेले थे. हम पहले भी कई बार अकेले थे पर इस बार कुछ अलग था. मुझे चाची का प्लान नही पता था. चाचा सुबह की फ्लाइट से देल्ही चले गये थे और मैं भी अपने जिम चला गया था. करीब 10 बजे मैं अपने जिम से आया और शर्ट उतार के रिलॅक्स करने लगा. कुछ देर के बाद चाची पाने ले के आई और मेरे बिल्कुल करीब आ के बैठ गयी. मेरी बॉडी को देख के बोली बड़ी मस्त बॉडी बना ली है आडी तूने और एक तेरे चाचा है. तेरी गफ़ तो तुझसे एक दूं खुश रहती होगी और तेरे चाचा मेरे को खुश ही नही कर पाते है.
उनकी बाते मुझे काफ़ी अजीब सी लगी और मैं उठ के जाने लगा. उन्होने मुझे रोका और कहा के ब्रेकफास्ट मैं क्या खाओगे. मैने कहा जो आप बनाओगे खा लूँगा. उन्होने कहा के जल्दी नाश्ता कर लो फिर एक ज़रूरी काम है तुझसे. मैने कहा के के काम है चाची बताओ पहले उसे कर देता हूँ. उन्होने कहा के पहले नाश्ता फिर काम. मैने पूछा के क्या काम है तो वो बोली मेरी थोड़ी मसाज कर दे बॉडी मैं काफ़ी पाईं हो रहा है.
मेरे को थोड़ी ऑड लगा पर मैने पूछा के क्या हुआ. ज़यादा पाईं है तो डॉक्टर के चलते है. उन्होने कहा के डॉक्टर के जाने की कोई ज़रूरत नही है तू मालिश कर देगा तो ठीक हो जाएगा. मैने कहा के ठीक है. कुछ देर के बाद हुँने नाश्ता कर लिया तो चाची ने कहा के बेडरूम मैं आजा मालिश के लिए. मैं उनके साथ बेडरूम मैं चला गया. उन्होने सारी पहन रखी थी तो मैने कहा के तेल से ये सारी खराब हो जाएगी आप दूसरी सारी या गाउन पहन लो. इतना सुनने पर उन्होने कहा के ठीक है तो मैं फिर सारी उतार देती हूँ और उन्होने सारी उतार दी.
अब वो केवल ब्लाउस और पेटीकोआट मैं ही थी. मेरे को एक दूं ही अजीब सा लग रहा था के चाची ऐसा क्यू कर रही है. वैसे चाची सेमी न्यूड लग बहुत सेक्सी रही थी. मैने उनसे पूछा के कहाँ मालिश करनी है तो उन्होने कहा के जहाँ मैं कहूँ वहाँ. मुझे समझ मैं नही आ रहा था के इस सिचुयेशन को कैसे हॅंडल करूँ और मैने सूचा के जो हो रहा है वो हूने दो.
चाची ने तेल की शीशी निकल के मुझे दी और वो बेड पे लेट गयी. उन्होने मुझसे कहा के मालिश करो. मैने तेल निकल के पहले उनके बालों मैं लगाया तो वो मुझे देख के ज़ोर से हासणे लगी. मैने पूछा के क्या हुआ तो वो बोली बहुत भोला है तू तो. मैने उनके सर की मालिश की और फिर पैर मैं तेल लगाया. मैने उनके पैरो पे तेल लगाया और फिर चाची ने कहा के तोड़ा और उपर मसाज करो. फिर उन्होने अपना पेटीकोआट कुछ उपर करा. उन्होने जैसे ही पेटीकोआट उपर करा मेरी ससेन तो जैसे रुख़ ही गयी. चाची ने नीचे कुछ भी नही पहना हुआ था और उनकी छूट मैं एक दूं सॉफ देख सकता था.
मेरा शक़ अब यकीन मैं बदल गया था और मैं समझ चुका था के चाची आखी चाहती क्या है. वो आख़िर आज अपनी प्यास भुजाना चाहती है. मैने चाही से पूछा के चाहती क्या हो आप. तो वो मुस्कुराते हुए बूली वो देख के भी नही समझा के मैं आख़िर चाहती क्या हूँ. मैने कहा तो फिर ये सब ड्रामा करने की क्या ज़रूरत थी. अब मैं भी फ्री हो गया हूँ आप की ही तरह. आज मैं आपके सारे अरमानो को पूरा कर दूँगा.
मैने चाची को अपनी गोड मैं उठाया और बाहर डाइनिंग टेबल पे ले गया. डाइनिंग टेबल काफ़ी बड़ी, मजबूत और उँची थी. चाची टेबल पे लेती हुई थी और पेटीकोआट एक दूं उँचा कर रखा था मतलब के वो नीचे से पूरी नंगी थी. मैने पेटीकोआट का नाडा खोल के उसे उतार दिया और बोला आब ठीक है. वो तोड़ा सा शर्मा गयी. मैने फिर तेल ले के उनकी थाइस पे लगाया और धीरे धीरे उनकी छूट तक हाथ ले गया. जैसे ही मैने उनकी छूट को चुया वो एक दूं काँप सी गयी. बहुत मज़ा आ रहा था उनको.
मैने दो उंगलियों से उनकी छूट थोड़ी छोड़ी की छोड़ी करके उसमे तेल दल डाला तो चाची की तो सिसकियाँ ही निकालने लगी. फिर मैने पहले एक उंगली अंदर बाहर की और फिर बदते बदते टीन कर दी. जैसे ही मैं चौथी उंगली डालने लगा चाची की तो किल्लई ही निकल गयी और वो गुस्से से बोली के फाड़ देगा काया. मैं मुस्कुरा रहा था. खैर मैं कुछ देर तक तीनो उंगलियाँ अंदर बाहर करता रहा और चाची सिसकियाँ लेती रही.
फिर मैं खड़ा हुआ और चाची के ब्लाउस के हुक खोलने लगा. ब्लाउस खुला तो देल्हा के चाची ने नीचे ब्रा फाइ नही पहनी हुई थी. मैं मुस्कुराते हुए बोला के आज तो पूरा प्लान था मुझे फसाने का. मैने और तेल लिया और उनके दोनो बूब्स को मलने लगा. हालांके उनके बूब्स काफ़ी बड़े थे पर उमर की वजह से शायद उतने टाइट नही थे. अब चाची पूरी तरह से नंगी थी. मैने तेल उनके डून बूब्स पे लगाया और उनके टिट्स को दबाने लगा. वो बहुत ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी. पुर घर मैं उनकी सिसकियाँ ही गूँज रही थी. मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से उनके टिट्स मसल रहा था और अब वो एक दूं टाइट हो चुके थे.
चाची एक दूं चार्ज हो चुकी थी और खड़ी हो के मुझे ज़ोर से जाकड़ लिया. मैने कहा चाची मेरी टशहिर्त और शॉर्ट खराब हो जाएगी. रुकिये मई इन्हे उतार देता हूँ वरना आप को ही ढोने पड़ेंगे. उन्होने मुझे धीरे से एक छाँटा मारा और बोली कितना ख़याल रखता है तू अपनी चाची का. उन्होने कहा चल अब मैं तेरी मालिश करती हूँ. मैं एक दूं टायर हो गया. उन्होने मेरी टशहिर्त और वेस्ट उतार दी. फिर वो बोली मैं तेरी मालिश तो करूँगी पर तेल से नही. मैने कहा मतलब. वो बोली अभी समझती हूँ.
उन्होने मुझे एक ज़ोर का लीप लॉक दिया. वो मुझे थोड़ी देर तक होतूं और फेस पे किस करती रही और फिर बोली और तयार होज़ा. मैं देख रहा था के वो आख़िर करने क्या वाली है. वो मेरी चेस्ट के उपर आई और स्पिट करना शुरू कर दिया. मैने कहा के ये क्या कर रही हो तो वो बोली जो कर रही हूँ मूज़े करने दो बस चुप छाप बायटो और मज़ा लो. अब तक वो मेरे पुर चेस्ट पे स्पिट कर चुकी थी और मुझे मुस्कुरा के देख रही थी. मुझे बिल्कुल भी अक्चा नही लग रहा था. वो मेरे करीब आई और बोली अब आएगा मज़ा तुझे और इतना कहके अपने स्पिट को जीभ से चाटने लगी.
उन्होने जैसे ही जीभ से मुझे चुया मानो मुझे 1000डब्ल्यू का करेंट लगा हो.
वो काफ़ी देर तक मुझे चट्टी रही और फिर काफ़ी सारा स्पिट मेरे निपल्स के किया और फिर से चाटने लगी. मेरे निपल्स पे उनकी जीभ का एहसास मानो एक परमानंद था. मेरा लंड भी एक दूं टन चुका था और शॉर्ट फाड़ के बाहर आने को बेताब था. चाची को भी एहसास हो गया था के मेरे लंड टन चुका है. वो अब मेरे पैरो के करीब गयी और मेरे शॉर्ट और अंडरवेर को एक साथ ही उतार दिया. मेरे लंड को हाथ मे ले के बोली कितना बड़ा है तुम्हारा और एक तुम्हारे चाचा है इसका आधा भी नही है.
लंड को हाथ मैं ले के वो उसकी खाल को उपर नीचे करने लगी तो मैं बोला चाची मूठ मरोगी क्या. ऐसे ही करोगी तो मैं तो झाड़ जाओंगा. मज़े लेना है तो इसे टेस्ट करो. वो बोली मतलब तो मैने खड़ा हो गया. मैं खड़ा था और चाची बैठी थी. मेरा लंड उनके मूह की सीध मे ही था. मैने पहले उन्हे ज़ोर का किस किया और फिर अपना लंड उनके मूह मैं डाल दिया. लंड मूह मैं डाल के मैं अंदर बाहर करने लगा मानो मैं उन्हे छोड़ रहा हूँ. थोड़ी देर मैं चाची को भी मज़ा आना लगा और वो ज़ोर ज़ोर से लंड को चूसने लगी. कुछ देर लंड चूसने के बाद मैने उनके मूह मैं ही पानी छोड़ दिया.
अब चाची की बारी थी. मैने कहा के बहुत तेल लगा हुआ है आपकी बॉडी पे पहले इसे ढोते है और फिर मैं आपको वो मज़ा देता हूँ जो चाहचहा ने आपको कभी नही दिया. मैने उन्हे फिर से गोड मैं उठा लिया और बातरूम मैं ले गया. चाची वजन मैं काफ़ी हाली थी तो उन्हे उठाने मैं कोई दिकाट नही होती थी. मैं उन्हे बातरूम मैं ले गया और शवर मैं नहलाने लगा. कुछ देर तक हम एक दूसरे को नहलते रहे. मैने उनके बूब्स और छूट को ढंग से सॉफ कर दिया.
मैने फिर उन्हे टाय्लेट के कपबोर्ड पे बिता दिया और अपने हाथों से उनकी टांगे छोड़ी कर के उनकी छूट चाटने लगा. मेरी जीभ अपनी छूट मैं महसूस करके वो एक दूं डेकाबू सी हो गयी और ऐसे तड़पने लगी लासे जल बिन मछली. थोड़ी ही देर मैं चाची ने पानी छोड़ दिया. मैने कहा के चाची इतनी जल्दी झाड़ गयी तो वो बोली के बेटा तेरे चाचा ये सब कहाँ करते है. पहली बार ऐसा हुआ है ना तो मेरी छूट को इसकी आदत नही है. अब तू आ गया है तो इसकी आदत पद जाएगी.
अब बरी थी चाची को छोड़ने की. चाची मेरे लंड को सहलाने लगी और कुछ देर चूसा तो वी फिर से टन गया. चाची ने कहा बस अब और मत तडपा और मेरे बदन की आग भुजा दे. मैने पूछा कहाँ चूड़ना चाहती हो तो वो बोली जहाँ भी छोड़े पर जल्दी छोड़ो अब और बर्दाश्त नही कर पा रही हूँ. मैं उन्हे बेडरूम मैं ले गया और उन्हे नीचे लेटया.
उन्होने तुरंत ही अपनी दोनो टाँगे छोड़ी कर दी के मानो कह रही हो के जल्दी लंड छूट मैं दल दो. मैं उनकी छूट को मसालने लगा और कुछ देर मसालने के बाद चाची तो लग रहा था के एक दूं आउट ऑफ कंट्रोल हो गयी है. मैने अब लंड उनकी छूट मैं डाला तो वो कराह उठी. हालाँकि उनकी छूट काफ़ी पूरनी थी पर अभी भी काफ़ी टाइट थी. मैने धीरे धीरे धक्के मरने शुरे मारे.
उनकी गीली छूट मैं एक दूं महसूस कर सकता था. मैने फिर एक बहुत ही ज़ोर का धक्का मारा और चाची की चीख निकल गयी और बोली और ज़ोर से मज़ा आ रहा है. मैने पूरा लंड अंदर डाला और फिर चाची के दोनो टॅंगो को साथ मिला के दबाने लगा. अब तो चाची की छूट टाइट हो गयी और धक्के मरने मैं भी मज़ा आने लगा. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगा. चाची के एक्सप्रेशन्स देख के लग रहा था के उनको जैसे जन्नत ही मिल गयी.
करीब 5 मिनिट तक धक्के मरने के बाद मैं झड़ने वाला था मैने चाची से पूछा के कहाँ झदून तो वो बोली अंदर ही कर दे बस रुक मत बहुत मज़ा आ रहा है. अब मैं झाड़ चुका था पर मैने धक्के मारना नही छोड़ा और धक्के मरते मरते लंड फिर से टाइट गया था. मैं चाची पे चड़ा हुआ था और तोड़ा तक भी चुका था.
मैने चाची से कहा के अब तुम मुझे छोड़ो. वो तुरंत मेरे उपर आ गयी. उन्होने मेरे लंड को हाथ मे ले के अपनी छूट मे डाल लिया और मेरे लंड पे कूदने लगी. वो तो ऐसे लग रही थी के जैसे पागल सी हो गयी है. दूसरी बार मैने उन्हे करीब 15 मीं तक छोड़ा और हम दोनो ही बिल्कुल बुरी तरह से तक चुके थे और दोनो बेड पे लेते हुए थे.
चाची को छोड़ते छोड़ते टाइम कब बीट गया पता ही नही चला. अब 2 बाज चुके थे और बहुत ज़ोरो के भूख लग गयी थी. मैने चाची से कहा के मैने आपकी प्यास तो भुजा दी और अब बहुत ज़ोरो के भूख लगी है खाना बनाओ. इतना कहके मैं उठा और कपड़े पहने लगा तो चाची बोली के आज दोनो मैं से कोई भी कपड़े नही पहनेगा और दोनो नंगे ही रहेंगे पुर दिन.
वो नंगी ही किचन की ऊवार चली गयी. नंगी वो एक दूं मस्त लग रही थी. मैं टाय्लेट मैं गया और फ्रेश हो के आ गया. मैने जैसे ही डोर खोला तो सामने चाची खड़ी थी और बोली अब जो भी होगा खुल्लम खुल्ला होगा. मैं अपना लॅपटॉप खोल के छत करने लगा. और कुछ देर बाद चाची ने कहा के खाना तयार है और आके खा लो. मैं जैसे ही बाहर गया तो फिर से चौक गया. चाची बाहर टांगे फेला के बैठी थी और बोली के आजा और डाल दे.
मैने हंसते हुए कहा के कौन सी दल बनाई है. वो हँसी और बोली के जैसे तुझे पता नही. उन्होने मेरा सर पकड़ा और अपनी छूट पे ले गयी और बोली छातो. मैने उनकी छूट चटनी शुरू कर दी. मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था और भूख भी लगी थी. मैने चाची को कहा के डॉगी स्टाइल मैं छोड़ूँगा तुम्हे इस बार और मैने पीछे से अपना लंड छूट मैं डाला और धक्के मरने शुरे करे. करीब 5 मीं बाद मैने चाची की छूट मैं चाड दिया और फिर हुँने खाना खाया. उस पुर दिन और रात हम ऐसे ही रहे और सेक्स करते रहे

चाची ने चुदवाया

मैं उन दिनों अपने चाचा के यहां आई हुई थी। मैं एम ए की छात्रा थी। चाचा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिये दिल्ली गये हुए थे। चाची घर पर ट्यूशन पढाती थी। चाची का नाम सुमन था। उनकी उम्र 35 वर्ष की थी। उसके पास कोलेज दो के छात्र पढने आते थे। रवि और सोनू नाम था उनका। दोनो ही 20 – 21 वर्ष के थे। मुझे पहले दिन से ही वो हाय हेल्लो करने लगे थे। उन दोनों से मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गयी थी। ऊपर का कमरा खाली था सो सुमन उन्हे वहीं पढाया करती थी।
एक बार जब सुमन ट्यूशन पढा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी। तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सुमन की चूंचियां दबा रहे थे। सुमन ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लन्ड पकड रखा था। सुमन बार बार आनन्द से सिसकारियां भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई।
मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी। मुझसे रहा नहीं गया…… मैं फिर से दबे पांव ऊपर गई … मैने फिर से झांक कर देखा… मुझे पसीना छूटने लग गया। कमरे में सभी नंगे थे… रवि ने अपना लन्ड सुमन की चूत में डाल रखा था…और तबियत से चोद रहा था…… सोनू ने अपना लन्ड सुमन के मुँह में दे रखा था… मैं फिर नीचे आ गयी… मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी… मैं अपनी चूत दबा कर बैठ गयी। मैं भी जवान थी…मेरे पास भी जवानी का पूरा खजाना था। मेरे मन में भी चुदवाने तेज इच्छा उठने लगी। मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी… जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा।
मैं मन मार कर कमरे से बाहर निकल आई… पास की दुकान से अपना मोबाईल रीचार्ज करवाने लगी। जब मैं वापस आई तो उनका कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। रवि और सोनू जाने की तैयारी में थे। मुझे देख कर कर वो दोनों ही मुसकराये, मैने भी उन्हे तिरछी निगाहों से मुसकरा कर देखा। वो दोनो चले गये और मैं सुमन की किस्मत पर जल उठी… जो कि दो जवान लण्डों की मालकिन थी। मेरे मन में हलचल हो रही थी…। मन अशान्त था …… मुझसे सुमन की चुदाई बरदाश्त नही हो पा रही थी।
रात के करीब 10 बज रहे थे…। मैने कमरे की लाईट बन्द कर दी और सोने के लिये लेट गयी। पर नींद कहां थी। रह रह कर सुमन की चुदाई की याद आ रही थी। मैने अपनी पेन्टी उतारी , रात को मैं ब्रा नहीं पहनती थी। मैने सोचा कि चूत में उंगली करके झड़ जाती हूं…… पर मुझे उसी समय बाहर कुछ आवाज आई… मैने दरवाजे से झांक कर देखा तो रवि और सोनू सुमन के कमरे की तरफ़ जा रहे थे। मैने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में आंखे गडा दी , यह दरवाजा चाचा के कमरे में खुलता था, और सुनने का प्रयास करने लगी। मुझे ये सुन कर हैरानी हुई कि सुमन उन दोनो के साथ मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी… पर कैसे…?
वे तीनों मेरे कमरे की ओर आने लगे। मैं भाग कर अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी। मुझे लगा कि वो तीनों मेरे कमरे के बाहर आ गये है…… तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला… मैने देखा सुमन पहले अन्दर आयी… फिर दोनो उनके पीछे पीछे आये……। मैने सोने का बहाना किया। सोनू ने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। पर तीनों मेरे साथ क्या करेंगे …… क्या बलात्कार… यानी मेरी चुदाई… मेरा मन खुशी के मारे उछलने लगा…बिना कुछ किये मन की मुराद पूरी हो जाये तो… फिर ऊपर वाले का धन्यवाद करो…। मेरा सोचना बिलकुल सही निकला। रवि ने लाईट जला दी… मुझे देख कर उन दोनो के मुंह में पानी आ गया। मैने पेन्टी और ब्रा वैसे भी नहीं पहन रखी थी। स्कर्ट भी जांघों से उपर आ चुका था। अन्दर से मेरी चूत झांक रही थी।
रवि ने बिस्तर पर पास बैठ कर मेरी छोटी सी कमीज़ को ऊपर कर दिया। मेरे नंगी चूंचियां उसके सामने तनी हुयी खडी थी। मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मुझे लग रहा था कि मेरी चूंचियां पकड कर मसल दे… लेकिन उसने बडे प्यार से मेरे स्तन सहलाये… मेरी नोकों को हौले हौले से पकड कर मसलते हुये घुमाया। इतने में सोनू ने मेरे स्कर्ट को ऊंचा करके मेरी चूत नंगी कर दी। अचानक मुझे मेरी चूत पर गीलापन लगा…… सोनू की जीभ से थूक मेरी चूत पर टपका कर उसे चाट लिया था…… मैं तड़प उठी… पर मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पडा। सुमन ने मेरे दोनो हाथ ऊपर कस कर पकड़ लिये। सोनू ने मेरी टांगे चीर कर फ़ैला दी। और मेरी टांगों के बीच में आ गया। अब मुझे लग गया कि मैं चुदने वाली हूं……तो मैने नाटक शुरु कर दिया…… मैने जाग जाने का नाटक किया…
“अरे ये क्या…… छोडो मुझे……… चाची…”
“चुप हो जा…कुतिया… मजे ले अब…”
” चाची… नहीं प्लीज़……”
इतने में सोनू का लन्ड मेरी चूत में घुस गया। मन में मस्ती छा गयी। चूत को लन्ड मिल गया था… तेज गुदगुदी सी उठी।
“सोनू…ये क्या कर दिया तूने… मुझे छोड दे……मत कर ना…मादरचोद…”
“रीता रानी … ऐसी मस्त जवान लड़की को तो चुदना ही पड़ता है… देख क्य टाइट चूत है…अब हम तेरी बहन चोद देंगे।” सोनू मस्त हो कर बोला।
रवि मेरे चूंचकों को चूस रहा था… सुमन ने खुद के कपड़े उतार फ़ेंके…वो पूरी नंगी हो गयी। हम सभी को पता था कि कार्यक्रम सफ़ल हो चुका है। सुमन ने रवि की पेन्ट और कमीज़ उतार कर उसे नन्गा कर दिया। सोनू पहले ही नंगा हो चुका था। चाची मुझे समझा रही थी
“देख रीता… लन्ड तो तेरी चूत में फ़िट हो ही गया है… अब मजा ले ले…ना’
“चाची… प्लीज़… मत करो ना…देखो मैं मर जाऊगीं…” मैने फिर नाटक किया। चाची ने मेरे होंठ चूमते हुये कहा
“अच्छा… दो मिनट के बाद छोड देंगे… मजा नहीं आये… तो नहीं सही… बस”
चाची समझ चुकी थी…कि मै यूं ही ऊपर से कह रही हूं और वास्तव में मुझे मजा आ रहा है।
“सोनू …मत करो…… इसे अच्छा नहीं लग रहा है… चलो मेरी मां चोद दो…”
अरे ये क्या हो गया…मैने तुरन्त पासा पलटा……
“चाची… तुम बडी खराब हो…एक दम हरामी … मां की लौड़ी”
मैने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया…। और रवि का लन्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनो सिसकारियां भरने लगे। चाची ने रवि और सोनू को रोक दिया।
“अब देखो कोई जबरदस्ती नहीं करना है…ये मादरचोद तो… रीता राज़ी है …”
सभी बिस्तर पर बैठ गये… मेरे बचे हुये शरीर के कपडे भी उतार दिये। फिर सुमन सभी को बताने लगी कि उन्हे क्या करना है… मैने अपनी बात रख दी,”पहले सोनू को मेरे पर चढने दो… उसका लन्ड मेरी चूत में रहने दो…फिर बात करो…”
“चलो सोनू तुम रीता को चोद डालो…रवि तुम मुझे चोदो… फिर बदल लेंगे…”
सोनू मुझसे लिपट गया… मुझे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा… उस ने मुझे तुरन्त मुझे घोड़ी बनाया… और अपना कड़क लन्ड मेरी गान्ड पर मारने लगा। तो सोनू अब मेरी गान्ड चोदेगा। मेरी गान्ड में उसने ढेर सारा थूक लगाया और लन्ड को छेद पर रख कर अन्दर दबा कर घुसा दिया… उसका लाल सुपाडा फ़क से अन्दर घुस गया। मैं आनन्द से निहाल हो उठी… दूसरे धक्के में आधा लन्ड अन्दर था… तीसरा धक्का लन्ड को पूरा जड़ तक ले गया…… गान्ड मैने कई बार चुदाई थी… इसलिये मुझे इसमें बहुत मजा आता है…उसका गान्ड में फ़ंसा हुआ मोटा सा लन्ड मुझे बहुत ही आनन्द दे रहा था। सोनू अब धीरे धीरे धक्के तेज़ करने लगा… उधर रवि और सुमन मेरे साथ ही आ गये… शायद रवि को मैं अधिक पसन्द आ रही थी… रवि ने मेरी चूंचियां पकड कर मचकानी चालू कर दी… सुमन ने भी अपनी कला दिखाने लगी… उसने अपनी दो उंगलियों को मेरी चूत में घुसा दी। मेरे मुख से आनन्द की हंसी और सिस्कारियां निकलने लगी। सोनू की धक्के मारने की गति तेज हो गयी थी… उसके मुख से आनन्द की सीत्कारें तेज हो उठी थी। मेरे चूतड अपने आप उछले जा रहे थे। मुझे ऐसे गान्ड मरवाने में बडा मजा आता था। सोनू के धक्के बढने लगे… उसका शरीर अकडने लगा।
अचानक सुमन ने मेरी चूत से दोनों उंगलियां निकाल दी और सोनू के दोनों चूतडों को कस कस के दबाने लगी। तभी सोनू के लन्ड ने मेरी गान्ड के अन्दर ही अपना वीर्य तेजी से छोड दिया। सुमन उसके चूतडों को दबाती ही रही जब तक कि उसका पूरा वीर्य नहीं छूट गया। तब रवि ने उसकी जगह ले ली। रवि बिस्तर पर लेट गया उसका खडा लन्ड मेरी चूत को आमन्त्रण दे रहा था … मैं रवि पर चढ गयी और उसके लन्ड को सीधे चूत पर टिका दिया… और फिर हौले से लन्ड पर दबा दिया…
“आऽऽऽऽऽऽह …… चुद गयी रे… चाची…”
“चुद जा… रीता…तेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार में ही तुझे दो दो लन्ड बिना कुछ किये ही मिल गये……चुद जा छिनाल अब…”
“चाची …… आई लव यू…… आप दिल की बात जानती हैं…आप बडी हरामी हैं…” मेरी बात सुन कर सुमन मुस्करा उठी…
“अब चुदने में मन लगा…रन्डी… मजा आयेगा…”
“हाय चाची …… चुद तो रही हू ना… देखो ना कैसे मोटे तगडे जवान लन्ड हैं…मेरी तो मां चोद देंगे ये…”
अब सोनू ने सुमन के उरोज पकड लिये… और लन्ड सुमन की गान्ड में घुसाने लगा… वह फिर से तैयार हो चुका था। सुमन हंस कर बोली-“देखा सोनू को … गान्ड मारने में माहिर है…… इसे सिर्फ़ गान्ड मारना ही अच्छा लगता है…”
मैं अब रवि पर लेट गयी थी… रवि नीचे से चुदाई का मजा ले रहा था। मैं उपर से उसे जबर्दस्त झटकों से चोद रही थी। मेरी गान्ड से सोनू का वीर्य निकल कर उसके लन्ड को तर कर रहा था।
“मेरे राजा… हाय…… क्या लन्ड है…मेरी चूत फ़ाड दे…राजा… ” कहते हुये उसके खुले हुये मुख में मैने अपना मुख चिपका दिया… मेरे थूक से उसका चेहरा गीला हो गया था… पर मैं उसे चाटे जा रही थी। मुझे कुछ भी होश नही था। मेरा पूरा जोर उसके लन्ड पर था। फ़च फ़च की मधुर आवाजे माहोल को और सेक्सी बना रही थी। चूत के धक्कों से फ़च फ़च कि आवाज के साथ वीर्य के छीटें भी उछल रहे थे। उधर सोनू सुमन की गान्ड चोदने में लगा था।
अचानक रवि ने अन्गडाई ली … उसका लन्ड कडकने लगा…बेहद टाइट हो गया… उसका चेहरा लाल हो गया… दान्त भिंच गये……
‘ मै गया…… रानी…… निकला… हाऽऽऽऽय्…… गया…।”
मैने धक्कों की रफ़्तार बढा दी… अपनी चूत टाइट कर ली……… और मेरा भी निकलने को तैयार हो गया। मैने चूत टाइट कर के दो धक्के खींच के मारे …… तो उसकी और मेरी उत्तेजना चरम सीमा को पार कर गयी-“राजा …… मैं तो पूरी चुद गयी………गयी मैं तो…… निकला मेरा… हाऽऽऽऽय्…”
उधर रवि को झटके लगने चालू हो गये थे… उसका वीर्य झटके मार मार कर पिचकारी छोड रहा था। मैं भी झडने लगी थी…… हम दोनो ने एक दूसरे को कस कर पकड लिया। हमारा माल निकलता रहा…। अब हम पूरे झड चुके थे। हम ऐसे ही पडे सुस्ताते रहे…फिर में बिस्तर पर से उतर गयी।
सोनू भी झडने वाला था। उसका लन्ड सुमन की चूत चोद रहा था। मै और रवि ने तुरन्त उनकी मदद की… सुमन के चूचकों को मैने खींचना और मरोडना चालु कर दिया। रवि ने सोनू के चूतडों को जोर जोर से दबाने लगा… सुमन अचानक धीरे से चीख उठी… “रीतू… छोड मेरी चूंची को …… मैं गयी…… हाय… बस कर सोनू…”
पर सोनू तो चरम सीमा पर पहुन्च गया था… चूतडों के दबाते ही उसका लन्ड बरस पडा…… सारा वीर्य सुमन की चूत में भरने लगा। मैने सोनू के चूतडों को थपथपाया… और प्यार कर लिया…
रवि, मैं, सुमन वहीं बिस्तर पर लेट गये… और बातें करने लगे। मैं बोली-“चाची…… आज तो कस कर चुद गयी… थेन्क यू …चाची॥”
“मैने तुझे देख लिया था… फिर जब दूसरी बार आयी तो मैं समझ गयी …कि तू चुदना चाहती है…”
“चाऽऽऽची… जब मालूम था तो वहीं पकड कर क्यों नहीं चोद दिया…”
“नहीं रीतू रानी… बिना तडप के… चुदाई की कोई कीमत नही होती है…”
“नहीं चाची…… आप मुझे पकड के चुदवा देती… तो भी मुझे चुदना तो था ही ना॥”
“और अब चुदने में ज्यादा मजा आया ना…”
“आय… हाय चाची………मन शान्त हो गया… चूत की खुजली मिट गयी…”
सोनू और रवि बिस्तर के एक कोने में नन्गे पडे ही खर्राटे भर रहे थे… हम दोनो भी न जाने कब बातें करते करते सो गये