Bete Saman Devar Se Chudwaya – Part 2

बेटे समान देवर से चुदवाया – भाग २

उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठकर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जाकर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोचकर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।
मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं रमेश को देखकर आती हूँ।
उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी….. मैं देखकर आया हूँ… वो अपने बिस्तर पर उल्टा होकर सो रहा है।
छोड़ो तो सही…..दरवाजा तो बन्द कर दूं- मैंने कहा।

देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में लेकर बिस्तर पर आया…. मुझे लिटाया….. मेरी मैक्सी ऊपर सरकाकर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी लेकर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया…. उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मज़ा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।
मेरी चूत रसभरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उसका आकार ऐसा क्यों है..??
मैं उठकर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई…. उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकालकर नजदीक से देखने लगी।
उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिलाकर करीब सात इंच लम्बा।
आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।
मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा… इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी…मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी…. जल्दी करो…. कहीं रमेश जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।
देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई…. मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी….. उसको जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटाकर कहा- बड़े कमीने हो तुम…. ! करते क्यों नहीं…??
इतनी जल्दी क्या है मेरी जान….? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया… मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को…….वो बड़े इत्मिनान से बोला।
मेरी चूत से लगातार बूंद-बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है… कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना…… फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
क्या कहा भाभी… जरा एक बार फिर बोलना जरा ! देवर बोला।
मेरे राजा… एक…. बार….. कर लो….. मेरी नीचे वाली तड़प रही है… उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना…. आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान…. मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है……. एक बार देखने दो…
मुझे खीज सी होने लगी थी।
क्या है देवर जी… तंग मत करो ना…. बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना… कहते हुये मैं लेटे-लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी… क्यों मेरा मज़ा खराब कर रहे हो …. करो ना…… नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊंगी……
अच्छा यह बात है ! कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा…..क से घुसेड़ दिया।
मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी….मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी… आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया…..।
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ..? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर…..
बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी ! मैंने कहा। कब से बोल रही थी… तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी? देवर ने पूछा।
मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया ! मैंने कहा।
बस इतनी सी बात……! अरे मेरी जान….. ! सब्र करो ! ऐसा मज़ा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा ! देवर ने कहा।
मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनो पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रखकर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई… चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था….. लाजवाब अनुभव !
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।
देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…
स्सीईईईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईईईईईईईई बस करो स्स्सीईईईईई देवर जी ब्ब्ब्बस्स्स्स्स्स्स्स करो ! मैं बुदबुदाई।
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा। जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआआआ निकलता। मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊंगी।
अपना लण्ड बाहर निकालकर….क्या बात है भाभी इतनी जल्दी….? देवर ने कहा।
मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं।
फ़िर तो आज सच में मज़ा आयेगा ! देवर ने कहा।
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है।
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा।
स्स्स्शाआआआआआ देवर जी….मत चूऊऊऊसो स्सीईईईईई।
देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतरकर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी ! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो…..।
मैं पलटकर उसके ऊपर आ गई। दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे-धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई। उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरककर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता। फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मज़ा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा। दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटाकर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा।
आआआ स्स्सीईईईईई ………ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईईईईई……देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी…… हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईईईईईईई !
मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई।
देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतारकर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी-बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा। दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा।
देवर ने पूछा- मज़ा आ रहा है भाभी….?
कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है ! मैंने कहा।
देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बनाकर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया।
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था। इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रखकर ही चोदा था। दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया। एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागो में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईईईई हाआआ निकल जाता।
हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी। लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा….. इतना जबरदस्त मज़ा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं।
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा। देवर ने मेरी मैक्सी निकालकर मुझे नंगा कर बेड से उतारकर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुकाकर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठाकर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकालकर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा। मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ-दस बार मेरी चूत को चाटा……
शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था। फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुकाकर मेरी कमर पकड़कर सटासट सटासट चोदने लगा।
ओ मां…… कितना मज़ा आ रहा था मैं यहां बयान नहीं कर सकती…।
जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता..इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता….मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी। मैं झड़ने वाली थी…. मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती….. आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो…. स्सीईईई हो…. आआस्स्सीईईईई हो…….गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽऽऽ।
मेरे दोनों पैर काम्पने लगे। देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनो पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा। मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था।

आगे क्या हुआ – जानने के लिए कल भाग ३ पढ़े