Behan aur Bhanji ki Ek Saath Chudai

बहन और भांजी की एक साथ चुदाई

मेरी दीदी की शादी तब हो गयी थी जब मई 8 साल का था. मेरी दीदी मुझसे बहुत प्यार करती थी. जब मई छोटा था तो मेरे सारे काम वोही करती थी. मुझे खिलती थी और मुझे नहलाती भी थी.

बात ये तब की है जब मई पिछले साल रखी पर दीदी के घर गया था. दीदी मुझे देखकर बहुत खुश हुई. बोली अच्छा हुआ अभिशेख तुम आ गये. मुझे दीदी ने गले लगा लिया. हम 5 साल बाद मिले थे रखी पर. मुझे मेरे काम से फ़ुर्सत ही नही मिलता था.

ना चाहते हुए भी मैने दीदी की चुचि महसूस की. उन्होने मेरे वाइफ और बचो की हाल चल पूछा. मैने उन्हे बताया की सब ठीक है और इस बार मैं 2-3 दिन रुकुंगा. दीदी ने बताया की घर मे बहुत मेहमान आए हैं. तो मैने कहा की ठीक है फिर मैं राखी बँधवा के ही वापस चला जौंगा.

दीदी ने कहा मई तुम्हे जाने नही दूँगी. तुम हमारे कमरे मे सो जाना. तुम्हारे जीजू भी टूर पर गये है. तुम मेरे भाई हो किसी को कोई परेशानी भी नही होगी. मैने उनके सास ससुर से मिला. उनका आशीर्वाद लिया. फिर राखी बंधवाया.

नाश्ता किया फिर घूमने निकल गया. दीदी ने बोला आज खाने पर मई तुम्हारे पसंद की चीज़ बनौँगी. जल्दी घर आ जाना. मई पास के ही थियेटर मे मोविए देखने चला गया. आते आते रात के 9.30 बाज गये. दीदी मेरी रह तक रही थी.

दीदी ने कहा तुम तो बहुत देर से आए हो. बाकी लोगो के सोने की तैयारी कर रही थी और लगभग सभी सो भी गये. मैने बताया मुझे जल्दी सोने की आदत नही है. मैने दीदी से कहा चलो साथ मे खाना खाते है.

दीदी से पूछा तुमने खा तो नही लिया. तो दीदी ने बोला नही रे भैया तुम्हारे बिना कैसे खा सकती हूँ.

दीदी – भैया अगर तुमको कुछ चाहिए रात के खाने के पहले तो हमारे रूम मे है.

मे – कितनी प्यारी दीदी हो तुम.

दीदी – श बोलो ना.

मे – दीदी मई रात के खाने के पहले थोड़ा लेता हूँ बस 1 – 2 पग.

दीदी – क्या चाहिए सूब है रूम मे. तुम वही बैठा के लो मई फ्रेश होके आती हू और ये कपड़े भी चेंज करती हू. चलो हमारे रूम मे. ये देखो जो चाहे वो लो.

मे – लव यू दीदी. तुम कितनी अच्छी हो. मई सिर्फ़ दो पग लूँगा. कुछ हल्का फूलका खाने के लिए दे दो.

दीदी – ऐसे ही लो ना तुम्हारे जीजू और मै ऐसे ही लेते है.

मे – तो फिर तुम चेंज कर के आओ दोनो साथ ही लेंगे

फिर दीदी बातरूम मे चली गयी और मै पग बनाना लगा. दीदी बाथरूम से निकली उसने सेमी ट्रॅन्स्परेंट नाइट गाउन पहने थी. मई उसे देखता ही रह गया. मैने दीदी के तरफ गिलास बढ़ाया. दीदी ने मुझसे पूछा क्या देख रहे हो. तो मैने कहा दीदी अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ. दीदी ने आँखें बंद कर के चियर्स करके पहला पग लेते हुए बोली बोलो जो बोलना है.

मे – तुम्हारी चुचि बड़ी मस्त है और फिगर भी कमाल की है दीदी.

दीदी – भैया ये क्या भाभी की भी है ना मेरे सी ही बड़ी. मई अब ज़्यादा मोटी हो गयी हूँ.

मे – लेकिन फिर भी गदराए जिस्म की बात ही कुछ और है.

हमने एक पग ख़तम किया. नशा तोड़ा तोड़ा होने लगा था.

दीदी – तुम्हारे जीजू भी यही कहते है. सब मर्द एक जैसे ही होते है.

उसके बाद मैने एक पग और बनाया. इस बार मैने स्ट्रॉंग बनाया था. दीदी ने लार्ज सीप लिया. मेरा लॅंड खड़ा हो गया था जिसे दीदी ने गिलास नीचे रखते वक़्त देख लिया. उसने मेरे खड़े लॅंड को देख कर बोला भाभी की याद आ गयी क्या. मैने जवाब दिया नही दीदी अभी तो तुम्हे ही देख के कुछ कुछ हो रहा है.

दीदी – क्यूँ शरमाते हो अब मेरी भी उमर 39 पार कर चुकी है इतना देख के ही समझ सकती हूँ. वैसे मुझे भी पीने के बाद तुम्हारे जीजू की याद आने लगती है.

मे – दीदी किसी को पता नही चलेगा अगर हम इस बंद कमरे मे कुछ करे तो. तुम्हे भी मर्द की कमी महसूस हो रही है और मुझे भी औरत की. और इस समय हम केवल मर्द और औरत है कोई भाई बेहन नही.

दीदी मुस्कुराइ और बोली चलो अब खाना खा लो. मैने उनसे आँख मार के कहा पहले जिस चीज़ की भूख लगी है वो ही खा लेते है. दीदी ने कहा जो मैने स्वीट्स बनाई है वोही खा लो. मैने उनसे कहा अपने हाथो से खिला दो. हम दोनो साथ मे बैठे थे दीदी मेरे चेर के पास आकर मेरे मुँह मे स्वीट्स दल देती है. और मेरी आँखें उनकी झूलती हुई चुचि पर है.

दीदी बोलती है यहा गर्मी है और अपने नाइट गाउन का एक बटन खोल देती है. मई दीदी से बोलता हूँ पानी भी पीला दो. दीदी और लेने को बोलती है लेकिन मेरी आँखें तो उनकी चुचियों पर टिकी थी. मै बोलता हूँ अगर इन कबूतरों पर रख के चाटने को मिले तो मज़ा आ जाए.

फिर हम बेड पर चले जाते है. दीदी बेड पर गिर जाती है और मई उनके उपर. दीदी के नाइट गाउन का बटन टूट जाता है गिरने के कारण. और चुचियाँ पूरी आज़ाद हो जाती है. मै तुरंत गेट बंद कर के आता हूँ और दीदी के चुचियों को चूसने लगता हूँ.

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दीदी मुझे ज़ोर से पकड़ लेती है और आहें भरने लगती है. मै एक चुचि चूस रहा था और एक चुचि को दबा रहा था. दीदी की आँखें बंद थी. लेकिन उनके चेहरे पर मस्ती सॉफ झलक रही थी.

दीदी – आह ये ठीक नही है.

मे – अब मज़े लो ना दीदी. अब हम मर्द और औरत है भाई बेहन नही.

दीदी हाथ नीचे ले जाकर मेरा लॅंड पकड़ लेती है और बोलती है इतना बड़ा. मे उन्हे सहलाने के लिए बोलता हूँ. फिर उनकी नाइट गाउन उतार देता हूँ. दीदी पेंटी नही पहनती थी. और उनके गांड पर हाथ फेरने लगता हूँ. दीदी मेरी लॅंड हाथ से आगे पीछे करती हुई बोलती है इतना बड़ा भाभी कैसे लेती है?

मैने उन्हे जवाब दिया दीदी तुम भी लॉगी और उछाल उछाल कर लॉगी और मज़ा भी खूब आएगा. फिर हम लोग किस्सिंग करने लगते है. हमारी जीभ एक दूसरे से मिलती है. और मज़े से स्मूछिंग चलती है.

मई दीदी की गांड को दबाते हुए किस्सिंग कर रहा था. दीदी पूरी वेट हो गयी थी. उनके निपल्स नुकीले हो गये थे. उनकी साँसें तेज़ चल रही थी. फिर हम 69 पोज़िशन मे आ गये. मैने अपना लॅंड उनके मुँह मे डाल दिया और उनकी बुर के छेद मे अपना जीभ फेरने लगा. दीदी मेरे लॅंड को चूस्ते हुए मेरे बॉल्स से भी खेल रही थी.

वो पूरी हॉट हो गयी थी. फिर बोलती है भाभी बहुत खुसकिस्मत है जो उनको इतना प्यारा लॅंड मिला है चुदवाने के लिए. फिर अपना तंग खोल देती है और मुझे बोलती है अब सहा नही जा रहा है अब छोड़ दे भैया. डाल दे अपना मूसल लॅंड मेरी बुर में.

मई दीदी के उपर आके एक ही झटके मे अपना पूरा लॅंड डाल देता हूँ. दीदी चीखती है ज़ोर से. वो मेरे जीभ को चूसने लगती है. फिर ज़ोर ज़ोर से चुदाई शुरू हो जाती है.

घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा घच्छ घचा

दीदी चूटर उठा उठा के मस्ती मे चुदवा रही थी.

दीदी – आ भैया मज़ा आ रहा है, डालो रे ये मुसली लॅंड डालो फार डालो मेरी बुर को. आहह अहहहहहा हहाः आहा हा

मे – ले बहना ले आज मई बहनचोद बन गया. लेकिन बड़ा मज़ा आ रहा है तुझे चोदने मे दीदी

दीदी – अब कौन भाई बस मै प्यासी औरत हू और तू मेरे मरद अघह डालो डालो ज़ोर्से लॅंड अग्घह घहघग एसस्स

फिर दीदी की चूतड़ उपर उठा के उपर से छोड़ने लगता हूँ. दीदी एक बार झड चुकी थी उनका रस बाहर तपाक रहा था. अब छोड़ने मे बड़ा मज़ा आ रहा था. लॅंड बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था. बहुत ही भीनी भीनी खुश्बू रूम मे फैल रही थी और चुदाई की आवाज़ और मज़ा दे रही थी.

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दीदी पूरा हेल्प कर रही थी. मै उनके चुचियों को चूस रहा था. एक चीज़ हम ग़लती से भूल गये थे. उनके कमरे की खिड़की बंद कर्मा. मुझे लगा कोई हमे वाहा से देख रहा है. घर के अंदर जो खिड़की होती है उसमे रुकावट नही लगी होती है. बाहर के खिड़की पर ही लोहे के बार लगे होते है.

हम चुदाई मे मग्न थे. बहुत ही मज़ा आ रहा था. दीदी के बाल खुले हुए थे. चुचियों को चूसने मे बड़ा ही आनंद आ रहा था. तभी एक आवाज़ ने हमे चौका दिया.

वंदना – मम्मी ये क्या हो रहा है मुझे भी करना है. मामा मुझे भी चोदो ना. मैने खिड़की से सब देख लिया है जब मुझे सहा नही गया तो मै अंदर आ गयी.

दीदी – उई मा! तू अंदर कैसे आई वंदना.

वंदना – मै खिड़की से आई. पहले तुम्हारी चुदाई देखी फिर आ गयी.

दीदी – अभिशेख छोड़ते रहो क्या मूसल लॅंड है रे तुम्हारा. ऐसे ही चोदते रहो अघ्घघग आह घ्घग ह

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वंदना – माना मुझे भी करना है प्लीज़.

दीदी – बेटी इधर मेरे पास आ. किसी से बताना नही प्लीज़. (दीदी ने उसकी हाथो के अपनी हाथो मे लेकर प्यार से कहा)

मई दीदी को मस्त छोड़ रहा था. दीदी अब झड़ने वाली थी. उसकी बॉडी टाइट हो रही थी. वो दूसरी बार झड़ने वाली थी. उसकी चुचि बड़ी मस्ती से हिल रही थी.

वंदना – मा अगर मामा मुझे भी चोदएन्गे तो मै किसी को नही बतौँगी. मुझे भी चुदवाना है बस.

दीदी अब झड चुकी थी.

दीदी – वंदना तुम्हे देखना है तो देख सकती हो. बेटी मामा का लॅंड बहुत बड़ा है तुम्हे तकलीफ़ होगी. अभिशेख अब लॅंड निकालो ना. मै झड चुकी हो.

वंदना – हन मुझे चाहिए चाहिए नही तो सोच लो.

मैने अपना लॅंड बाहर निकल लिया. फिर दीदी ने मेरे रस से सने लॅंड को हाथ मे लेकर वंदना को दिखाया और बोला देख कितना बड़ा है तेरी बुर छोटी है उसमे कैसे जाएगा ये.

वंदना – मुझे ट्राइ करना है. मेरी दोस्त कहती है पहले दर्द होता है फिर बहुत मज़ा आता है.

दीदी – बेटी तुमने किसी का लिया नही अब तक.

वंदना – लिया नही पर आज लेना है. मामा बोलो ना मुझे भी चोदएन्गे ना. प्लीज़ मामा प्लीज़..

मे – बेटी तुम्हे दर्द होगा.

वंदना – चलेगा.

अभिशेख तुम इसकी चूची चाट मै इसकी चूची चूस्ती हू. तब तक तुम मुझे और छोड़ो और अपना माल निकल दो मेरी बुर में. मैने बहुत दिन से गरमा गरम माल नही फील किया छूट के अंदर. आओ ना छोड़ो. फिर मैने वंदना की बुर अपने मुँह के सामने किया और उसे चाटने लगा. दीदी उसकी चुचियों को चूसने लगी. मैने अपना लॅंड फिर दीदी के बुर मे डाल दिया था. और मस्त चुदाई फिर शुरू हो गयी.

फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह

फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह

फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह फकक्चह्ा फ़चह

दीदी वंदना की निपल चूस रही थी. मई उसकी कुँवारी बुर को चाट रहा था. क्या मस्त बुर थी. छोटी सी प्यारी सी. उसकी खुसबू मुझे पागल कर रही थी. दीदी अब मुझे पानी अपने बुर मे डालने के लिए बोल रही थी. मैने अब जाबर दस्त झटके मरने लगा. अब मै भी झरने वाला था. दीदी ने मुझे कहा थोड़ी सी बुर मे डालने के बाद बाकी मेरे चुचियों पर गिरा देना. मई तुम्हारा गढ़ा रस देखने चाहती हूँ.

नादिता अपनी आँखो के बंद कर के बोली. मामा बहुत मज़ा आ रहा है. मुझे आपका लॅंड चाहिए. तभी मै झरने लगा. तोड़ा सा अंदर गिरने के बाद. मैने अपना लॅंड बाहर निकाला और पिचकारी दीदी के चुचियों की ओर छोड़ दिया. दीदी की चुचियाँ मेरे गढ़े रस से नहा ली.

दीदी – देख कितना बड़ा है तेरे मामा का. बॉल्स पकड़ इसके. भैया कितना गढ़ा है तेरी पिचकारी.

वंदना – हा मामा बहुत गढ़ा है आपका रस. ये लंबा लॅंड मुझे भी डलवाना है.

दीदी – बेटी अब ये लॅंड थोड़ा मुरझा गया है, मै इसे चाटती हूँ और बाद में बुर चाटूँगी. जिससे तुम्हे इसे लेने मे आसानी होगी.

दीदी पहले अपने जीभ से मेरे लॅंड को सॉफ किया और वंदना को दे दिया चूसने के लिए और उसकी बुर चाटने लगी. वंदना की मुलायम बुर को चाटने का मज़ा अब दीदी ले रही थी. और वंदना मेरे लॅंड को मज़े से चूस रही थी. दीदी अब अपनी जीभ उसकी बुर के अंदर डाल रही थी बहुत अंदर तक.

वंदना और गरम हो गयी थी. और तड़पने लगी थी. मै वंदना की चुचियों को मसल रहा था. वो चीख रही थी. आआहह धीरे मामा. … मा बहुत मज़ा आ रहा है. वंदना एक बार झार चुकी थी. दीदी उसकी रस को पी रही थी.

मेरा लॅंड अब फिर से खड़ा होने लगा था इस कुँवारी जिस्म को देख के और उसके मस्त चाटने से. दीदी ने उसे बेड पर लिटाया, कमर के नीचे तकिया लगाया जिससे बुर खुली दिखने लगी. और वंदना को किस करने लगी जिससे अगर वंदना सील टूटते समय चीखे तो आवाज़ बाहर नही जाए.

दीदी ने मेरे लॅंड उसके मुहाने पर टीकाया और मुज़ेः कहा भाई धीरे से डालना. मैने हल्का सा झटका लगाया. लॅंड थोड़ी दूर जाके फस गया. दीदी ने वंदना का मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया. पर उसके आँसू नई रुक पाए. उसके गालो पर बहने लगे. दीदी उसे किस करने लगी. मई उसकी जाँघ और कमर सहलाने लगा.

थोड़ी देर मे उसका जब दर्द कम हुआ. मै उतनी दी डोर मे आगे पीछे करने लगा. हर दो तीन झटकों के बाद एक तोड़ा तेज़ झटका लगा देता. मैने आँखों ही आँखों मे दीदी को इशारा किया. दीदी समझा गयी. दीदी ने उसका मुँह पूरी तरह धक लिया अपने मुँह से.

फटाआआआआआआआआआआक्कककककककककककककचह

और पूरा लॅंड अंदर. सील टूट गयी वंदना की वो तोड़ा छटपटाने लगी. पर दीदी उसका शरीर सहलाने लगी. मई थोड़ी देर रुक गया. फिर धीरे धीरे चुदाई शुरू.

फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक फ़च्चा फॅक

वंदना को दर्द हो रहा था. पर मै कहा रुकने वाला था. मुझे टाइट छूट छोड़ने मे मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर बाद वो भी मज़ा लेने लगी. उसका दर्द कम होने लगा होगा. फिर दीदी ने उसका मुँह को आज़ाद कर दिया. वो अब मज़े से गंद उठा उठा के मेरे धक्को का जवाब दे रही थी.

दीदी नीचे जाकर कभी मेरे बॉल्स चूस रही थी तो कभी वंदना की छूट के नीचे का रस. फिर दीदी उपर आई और वंदना के मुँह मे अपनी चुचि दे दी.

दीदी – चूस बेटी चूस मेरी चुचि चूस. तूने 5 साल तक मेरी चुचि से दूध पिया है. आज भी पी ले.

वंदना – हा मम्मी दो मुझे आज भी पीना है.

फिर वंदना दीदी की चुचि चूसने लगी. और मै मज़े से टाइट बुर चोद रहा था. मखमली कमर पकड़ के शॉट लगा रागा रहा था. थोड़ी देर के बाद मुझे वंदना को उल्टा कर के चोदने का मान कर रहा था. उसके चुतताड महसूर करने का मान कर रहा था.

मैने दीदी को बोल दीदी अब लेट जाओ और वंदना से अपनी छूट चटवओ. मई इसे पीछे से छोड़ूँगा अब. मैने वंदना को कुटिया स्टाइल मे कर दिया. पीछे से बुर मे लॅंड डाल दिया. और उसके बाल पकड़ के चोदने लगा. और उसका मुँह दीदी के बुर पर थी. हर झटके के बाद वो अपनी पूरी जीभ दीदी के बुर के अंदर डाल देती. बाल छोड़ के अब कमर पकड़ के ज़ोर ज़ोर से शॉट लगाने लगा.

घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप घापपाअक घाआप

पूरा कमरा चुदाई और सिसकारियों की आवाज़ से गूँज रहा था. वंदना अब झर चुकी थी. दीदी की चूसा हो रही थी. वो भी अब बहने लगी थी. वंदना अब अपनी मा के रस को पी रही थी. मै भी अब झरने वाला था. मई ज़ोर ज़ोर से छोड़ते हुए अपना सारा माल वंदना के बुर मे ही गिरा दिया. मेरे लास्ट झटके के बाद मई उसपर गिरा और उसका मुझ दीदी के छूट पर.

फिर थोड़ी देर तक हम तीनो ऐसे ही पड़े रहे. दीदी उठी और अपना बुर सॉफ किया. वंदना को उठा कर बेडशीट बातरूम मे डाला. उसपर वंदना के सील टूटने के कारण खून के धब्बे पद गये थे और हम लोगो कर रस भी लगा था उस पर. फिर हम तीनो कपड़ा पहन कर सो गये. वंदना अपने कमरे मे सुबह 5 बजे चली गयी.