Monthly Archives: September 2015

उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे

हाय मेरा नाम विपिन है।मेरी वर्तमान उम्र ३५ साल है। मैं अपनी किशोरावस्था से बहुत ही सेक्सी रहा हूँ। मैं अभी इंदौर मैं रहता हूँ। मैंने आज तक करीब ५० से ऊपर लड़की और आंटी के मजे लिए हैं और उनकी चूत को अपने लंड के दर्शन कराये हैं।
मेरे साथ घटी एक घटना आपको बता रहा हूँ, कहानी सच्ची है पर पात्रों के नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मेरी उम्र २७ साल थी।
एक दोस्त के माध्यम से एक मुस्लिम परिवार में आना जाना था। पाँच लोगों का परिवार था वो। पति सलीम ट्रक ड्राईवर जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था जिसको मैंने कभी घर पर नहीं देखा और न ही उसकी शकल जानता हूँ। पत्नी शबनम, थोड़ा सांवला रंग पर कसा हुआ बदन ३४-२८-३६ उम्र उस समय ३६-३७, बड़ी लड़की शमीम उमर १८, रंग साफ़ ३०-२८-३४ दिखने में साधारण उससे छोटी बानो, और सबसे छोटा लड़का उम्र १० साल मैं एक बार उनके घर गया तो शबनम ने कहा कि घर मैं तंगी है इसलिए शमीम को कहीं नौकरी लग जाए तो अच्छा रहेगा। मैंने मेरे ऑफिस में उसको नौकरी पर रख लिया। मैं उस वक्त तक उनके बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोचता था।
करीब एक महीने तक उसने मेरे यहाँ काम किया उसके बाद २-३ दिन वो आई नहीं, मैंने भी ध्यान नहीं दिया, एक दिन मैं मार्केट मैं था तो मुझे शमीम जाती हुई दिखी। मैंने बाईक उसकी तरफ़ मोड़ी और उससे पूछा कि क्या बात है तुम ऑफिस नहीं आ रही हो?
तो उसने बोला कि तबियत ठीक नहीं थी, और अभी आप मुझे घर छोड़ दो।
मैंने उसे बाइक पे बिठा लिया, इससे पहले मैंने कभी उसे बाइक पर नहीं बिठाया था। उसके बैठते ही उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे। मेरा लंड खड़ा हो गया।उसका घर दूर था हम बात करते हुए चल रहे थे, रास्ते में सिनेमा हॉल आया तो मैंने उसे पूछा कि पिक्चर देखनी है ?
उसने हाँ कर दी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही गया था सो उसे ठंडा करना जरूरी भी था। सिनेमा हॉल में मुश्किल से ३० लोग भी नहीं थे। हमने कोने की सीट पकड़ी और बैठ गए। पिक्चर चल रही थी कि मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने सिग्नल ग्रीन समझ कर धीरे से उसके मम्मों पर हाथ रख दिया उसने उसका भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई, इधर पैंट में लंड कड़क होने लगा था।
मैंने धीरे -२ उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए उसे भी अच्छा लग रहा था। धीरे से मैं अपने हाथ उसके कुरते के अन्दर ले जाकर उसकी ब्रा के ऊपर और अन्दर से उसके निप्पल और गोलाई के मजे लेने लगा। पर दोस्तों ! मजा अभी भी अधूरा था।
तो मैंने धीरे से उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा था पर वो शायद पहल करने में अभी भी शरमा रही थी। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड जो अब तक काफी तगड़ा हो चुका था बाहर निकल लिया
और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया, वो शायद इसका ही इंतजार कर रही थी।
इधर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। वो भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी। मैं कभी उसके दूध दबाऊं और कभी उसकी चूत में उंगली डालूँ।
दोस्तों मुझे बिल्कुल भी अपनी तकदीर पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे अकस्मात मुझे उस लड़की का सब कुछ मिल जाएगा जिसे मैंने कभी इस नज़र से देखा ही नहीं।
इधर उसके हाथ मेरे लंड पर कसावट के साथ चलते जा रहे थे और दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ जो उसकी चूत में था उसको पकड़ लिया और मेरे हाथ को वो अपनी चूत में तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगी। उसकी चूत ने थोडी देर में ही पानी छोड़ दिया जिसे उसने अपने रुमाल से पोंछ लिया। अब उसकी बारी थी मैंने उसे मेरा लंड मुंह में लेने के लिए बोला तो उसने ना कर दिया। फिर वो मेरी तरफ़ इस तरीके से मुड़ गई कि मैं उसके दूध पी सकूं मैंने उसके दूध पीने शुरू कर दिए, इधर उसने मेरे लंड पर अपना हाथ और तेज़ कर दिया जिससे मेरा पानी निकल जाए पर कमबख्त पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर मैंने उसकी सलवार उतार कर घुटने तक कर दी और पैंटी नीचे खिसका कर उसे इस तरह से बिठाया कि उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर आ जाए। मैंने उसे इस पोसिशन में बिठाकर नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए मेरा लंड उसकी चूत में अन्दर तक गया था, वो भी मेरे लंड के मज़े लेने लगी इधर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबाना और मसलना जारी रखा। करीब तीन मिनट की उछल कूद के बाद उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबा ली और मेरी जाँघों पर अपने हाथ कस लिए। मैं समझ गया कि ये अब जाने वाली है, मैंने भी अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल कर उसके मम्मे दबाते हुए अपना पानी निकाल दिया।
उसके बाद हमने अपने-२ रूमाल से अपने लंड और चूत साफ़ किए और सामान्य होकर बैठ गए। उसने बोला कि अब आप मेरे को घर छोड़ दो क्योंकि घर पर मेरा इंतज़ार हो रहा होगा। उसने मुझे ये भी बोला कि घर पर मत बताना कि हम पिक्चर गए थे। दोस्तों मुझे चुदाई का शुरू से ही बहुत शौक रहा है। अभी मैं चाहता हूँ कि नई चूत चोदने के लिए मिले ! अगली बार आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने शबनम और उसकी बेटी की एक ही पलंग पर रात भर चुदाई की। मेरी अगली कहानी का

Teacher ki Chudai

“All right class, since college’s out in three minutes, you can use this
time to chat. The assignment is to read pages 52 to 63 and write a response to
it.” That was me, Miss Nandini Hari; English teacher and ordinary nice
person. I am 23 years old and have been teaching since I graduated from college
was about three years ago. I have black hair that goes down to the small of my
back. I’m about 5’7″ and a little bit under weight. I don’t think I’m very
pretty, but that’s not what other people say. The bell rang and everybody
jumped up from their seats. Neena Menon, a very attractive young woman of 18
came up to me. Now, I am not the kind of person who cares about rumors very
much, but I had heard from other people that Neena was a very loose girl. That
doesn’t particularly strike me as funny, but I always giggle like mad whenever
I think about it. I tried to keep a straight face as I asked her what she
needed. “Miss Hari?” “Yes?” “Could I, stay after
college today and work with you. I mean, you know how my grades are pretty bad
and everything… “She trailed off and looked at me hopefully with her
baby browns. Now that was only half true. While she had a ‘C-‘ if she didn’t
turn in this project that we were working on, her grade drop to a very definite
‘F.’ “Of course Neena. What do you want to work on?” The door clicked
shut as the last person left the room. Neena was wearing a tight cream salwaar
kharta embroidered with gold strands and white dupatta. She had a v-neck on the
kharta that exposed abit of cleavage at the top when she leant forward. Her
black hair was pulled back into a simple ponytail. If you looked more closely
at the v-neck, you could see her black bra poking out over her generous
breasts. We sat down at two of the desks and got to work. She was a smart girl
and seemed to pick up stuff pretty well. When I asked her what she was doing
for our class project however, she blushed and said that she hadn’t started on
it yet. After about half an hour of work, she winded up standing over me on my
left side with her right arm around my shoulder. I turned to say something to
her and got a generous look down her salwaar. I moved, or tried to, but I was
already pushed back against the backrest of the seat. She moved quickly and I
found myself with her sitting directly in my lap. Each of her legs were
straddling my lap and she had her hands around the back of my neck. She leaned
forward and whispered into my ear with the sexiest voice I have ever heard.
“Miss Hari, is there any other way I can get an ‘A’ in your class?”
With that, she leaned back and took off her salwaar. I got my second look at
her bra. It was fairly lacy with about three fourths coverage. I could see her
nipples underneath the black fabric. They were an erotic dark chocolate color.
She let go of her salwaar and it wafted gently to the floor. She grasped the
back of my head and pushed it to her chest. “Miss Hari?” She queried,
“If I make love to you, will you give me an ‘A’ in your class?” I
tried to say something but my throat was so dry that I could only manage a
feeble nod. I could smell the perfume on her chest and could hear her heart
thumping away. The smells and sounds were really turning me on. It was amazing
how such little things gave such extreme responses.She climbed off me and tugged
on the straps of her bra. Her fleshy breasts jiggled in a wonderful little
dance. She told me to go and sit in my chair with my legs parted. I went as she
commanded, feeling my nipples become stiff with apprehension. She set me down
and started to unravel my saree. She kissed her way closer to my waistline.
When she got to where the saree was tucked into my petticoat she grasped it in
her hands
and pulled it out completely. Now my saree was hanging open and I was
completely exposed save for my bra and below my waist.She pushed my petticoat
up so it was all around my belly button. I felt suprised to see myself slightly
wet. Neena grasped my filmy bikini underwear and tugged at it. It slid easily
over my legs and down to my ankles. She told me to hold her tits. I was
trembling since I have never had an experience like this before. I slid my
hands down her shoulders and cupped her breasts in my hands. I was amazed to
see how erect her nipples were and the wonderful feeling it was to have another
woman’s private parts in my hands. It appeared she was enjoying this more than
I was. Now, I don’t have a whole lot of pubic hair. I keep it trimmed very
short in a little diamond shape. This seemed only to please my student even
more. She looked up at me and gave out a very evil grin. She stuck her tongue
out tenderly and licked the top of my pussy just above the hair line. Oh god
what a feeling, I made a light moan and grabbed her breasts without control.
She entered me and lightly probed around. It appeared she had done this before.
It was an amazing feeling. I could feel this tensing muscle inside me, probing.
Sometimes it would harden, and sometimes it would just lick. There was a slight
tingle inside my womb as I could feel the beginning of an orgasm but it was about
a good five minutes away. I wanted her so badly and I moaned, willing for her
to continue. “Suck me, “I said. “Take my clit and rub it.”
Silently she obeyed. She hadn’t left my pussy since she had first entered it. I
was very close to coming now. Just a few more strokes with the tongue and I
would be over the edge. Past the point of no desirable return. I told her that
I was about to come and she just went faster. Faster. Oh my how dare she go
faster? It was not fair that a person of such youth should be able to make
women come so powerfully. Yes, and powerful it was, for when I came, I thrust
my hips upward so as to force every bit of her mouth inside me. She made a
little giggle as my sweet juices rained down on her. I have tasted my juices
before for other men but have never had another woman taste them. “Do- do
they taste good?” I moaned. My clit was still hard and I wanted to come
again. “Yes, “she whispered. “They are delicious. But you are
all wet, I must clean you.” With that she dove into me again. I don’t
think that I will ever get over that feeling of complete and total ecstasy that
I felt when she pushed her wet tongue into my crack. Unthinkingly, I took my
left hand and placed it on her nipple. I remember being so suprised because it
was the hardest thing I have ever felt except for maybe a rock. That single
nipple was such a turn on itself. I took that solitary nipple with my
forefinger and thumb and pressed it. She gasped inside me, letting the air in
her lungs out in a big whoosh. I felt that hot air go inside me and just
marveled at the fullness of it. I wanted that again so I took my other hand and
did the same thing with her other nipple. Now I had two bits of erotic stone
captured between my fingers. I took those pieces of rock, and I yanked on them.
Inside me, Neena screamed. I tugged on those two nipples, pulling her forward
into my pussy. She came forward eagerly and gummed into my clit. I mean this
literally. She pulled her lips over her teeth and bit. Then, when it was firm
between her lips she licked the tip of it that was in her mouth. Oh that
brought me over the edge so fast. I came, practically ripping her nipples off
her chest. Over and over the feeling of unrelenting pleasure flew throughout my
body. I could taste the sweat running down my face and into my mouth. I could
feel my ass gliding over the seat from the juices and sweat mixing to
michael jackson form a wonderful lubricant. Oh my yes, and I could feel her moaning. Moaning inside
me, begging for me to keep pulling her nipples. I took those nipples, and I
pulled them up to my mouth. There was a tiny protest from Neena that she was
supposed to be pleasuring me, but that quickly stopped when I closed my mouth
over her puckering nipple. Protests turned to whimpers, whimpers to gasps, and
gasps to screams as I forced her orgasm without even touching her pussy. Now
you might ask, where were her fingers while I pleasured her left breast? Well,
my dear, those wonderful fingers were inside me probing and forcing me to keep
licking her tit. Pleasure her I did, for I didn’t stop licking her for an
instant.We slipped and slided over my chair, and winded up on the floor,
kissing each other so passionately. Our pussy hair rubbed against each other’s
and we pressed them together willing the exchange of juices to take place. I
wanted to come again. I told her to make me come or I won’t give her an ‘A’.
She moaned back to me that she didn’t even care about the grade anymore, she
just wanted to fuck me. She laid down on her back and opened her mouth. Her
tongue, glistening with my spit and juices more than her own saliva, was
licking her lips suggestively. I got on all fours and lowered myself into her.
Facing her pussy, I desired to watch what happened to her as she orally fucked
another woman. From the sight of it, her pussy enjoyed it as much as I did. It
was hard to keep my eyes open with the pleasure I was receiving. She moved her
legs around, letting her juices flow out of her and soak my carpet. Soon, I
couldn’t take the sight anymore. I leaned forward and put my mouth over her
soaking slit. As I kissed her wonderful sex for the first time, I heard her
scream and felt her arch her back. I saw her clitoris practically fly out of
her slit to greet me. “Suck me!” screamed her clitoris, “suck me
now!!!” I was almost too happy to oblige. I sent my mouth downward, and
entered her. As I stuck my tongue into her pussy, I felt a wonderful swelling
and soon my mouth was full of sticky sweet juices. I had made a girl come! Oh
god that was more a turn on than anyone can possibly imagine. I didn’t stop
there however, while I was impossibly close to coming myself, I wanted her to
have mutual satisfaction. We must achieve orgasm at the same time. I know it is
so, it is written in the books. So plunge into her I did. Relishing our
sixty-nine and making it work. A while later, it could have been thirty seconds
it could have been three minutes, both of us were bucking wildly forcing our
tongues farther and farther into each others pussy. We came so hard that I was
suprised someone in the college didn’t hear. She got an ‘A+’ on her report
card.

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love story

sundas hayat bhi unhi mazi ki yaadon mein mazi k darichy kholy behti thi.kuch yaadein kuch khayalat unhai khud sy apni zindagi ki riyasat ki hukmarani sop daty hain.or kuch rishtay kuch Aahsas hum jin sy bilkul anjaan hoty hain.achanak hi wo sary k sary Aahsast hamari zindagi ki tasveer mein kuch shok or madham rang liya dil ki dehleez par dastak dany lagte hain.

sundas hayat bhi aaj kahin rooz bad un lamhon ke hisar mai thi jin sy bahir nikal kar jeny ki tamana karti tu zindagi hone ka Ehsas uski zaat ko be mine kar jata. or un lamhon ko jeti tu zindagi jaise ke jeene ki waja mil jati.

hamari zindagi sy kahin rishtay jory hoty hain jin rishton ke milne se khoobsurat ghar ki takmeel hoti hai. sundas ki zindagi mein jaane kahan se ek tharao Aagaya tha aaj bhi wo apne kamre mai ankhe mundy sab se ajnabi ho kar unhi yaadon ko zaat ka mehwar banay yaadon ki chadar odhe Aankhen mundy guzre lamho ko yaad kar rahi thi. par kabhi kabhi hum kuch rishton ko kuch jazbon ko khud hi pamela kar daty hain.kabhi apni Aana ko samny lakar kabhi nadangi main.

ya bhi ek hakikat hai rishtay or un main chupi muhabbat rayt hi ki manind hoti hai ke jab tak muti band rahy ya ap k hathon main rahty hain muti jasy hi kholti hai phisal tajaty hain girty chaly jaty hain sachai sy kaim kiya rishaton ko hum abro ki chadar mai dhanp kar rakhty hain par kabhi kabhi be yakini be Aatabari or shaq unhai hum sy bahut dor kar deta hai.

sundas hayat bhi ek hasti muskarati larki thi be sakhta hi khayalon, khayalon main muskura dena or lab khamush hoty tu jasy us k dil ki har baat us ke jazbon ko wo do “2” Aankhen sab kuch Aaya kar dati .

sundas ki zindagi apny ghar or khayalon ki duniya ya coleg tak hi mahdud thi sundas thi bhi Aay si k us hai bahut chaha jay us ki Aarzoo ki jay sundas bhi tu ek Aam larki hi thi wo jab tanhahi main hoti tu wo bhi kuch sapny Aankhon main tartib dati or unhai apni marzi k rung phana kar saja sawar kar apne Aanchal mai ek ek kar k tank ne lagti us ki sochon mai bhi kisi shahzada ki tasveer thi jis k sat kisi lambe safar par us ka hath tham kar kahin manzilon tak safar karne ki Aarzoo bhi panapti thi.

sundas jahan kahin nigahon ko apna muntazir pati un mai sy ek hassan bhi tu tha.jo har roz jab wo coleg sy wapis loti ushai apne rasty mai khara pati ushai hi apna muntazir pati.hassan jis ki muhabbat jany kis inteha par thi ya shahid hassan ny sundas sy mohabbat ki inteha sy hi ibtida ki thi.

kabhi kabhi zindagi mai kuch log kuch jazbat mai kuch rishton ki inteha tak jaane ki koshish karte hain.unki khawish ek tamana ek jazba rahta hai ke wo kisi ki chaa main ya kisi sy apni waafa ka sabut dane ki khatir tamam hade par kar jain apni jaah sy bhi guzar jain.

hassan ny bhi sundas sy muhabaat ki inteha sy hi ibtida ki thi.tabhi tu Aaksar raaton ki tanhaiyon main ek hi shar us k naam sirf sundas k naam kiya karta.

Lipta hai Mere Dil se kisi Raaz ki Surat,
Woh shakhs k jis ko mera hona bhi nahi hai.

Ye Ishq-e-Mohabbat ki Riwayat bhi Ajeeb hai,
Pana bhi nahi hai Usey , khoona bhi nahi hai

hassan sundas ko chaah kar bhi kabhi kuch na kha pata wo darta tha ushai khone k Aahsas sy abhi ek bharam tu kaim tha.shayad wo bhi ushai chati ho ushai hi sochti ho jase hassan k har lamhe,har pal mai wo shamil thi. kehne ko tu hassan ek work shop par kam karta tha us ke walid fout ho chuke thy.or ghar par ek budhi maa thi.halat bhi Aayse na tha k wo ziyada phar sakta wo matric hi kar saka. hassan ki shaqsiyat badalti duniya k rungon sy Aai thi subho sy sham tak work shop par kam karna or raat kisi ki yaadon mai basar karna sirf uski ek jhalk pana k liya wo work shop sy kuch dar ki chuti lay kar tapti dhup mai sundas ko dekhne k liya khara rahta. or ek nazar dekh kar bina lab hilay work shop ki taraf chal deta.

hassan aj bhi sundas ka muntazir tha 2 ghanty dhup mai kharay rahne k bad wapis lota.ishi tarhain poray 8 rooz guzar gae par hassan sundas ki ek jhalk na dekh saka.inhi dino sundas ki zindagi mai kahin rang bihkre.sundas k mamo jo kahin barson bad london sy wapis pakistan Aary thy.sundas ne apne mamo ko bachpan mai dekha tha ab jab wo wapis Aary thy tu itne barson bad bhala wo tanha ke se wapis Aate.

un k sat unki zindagi bhar ka ek bahut kimti Aasas bhi tha.un ke hamra un ka beta ali bhi tha.jis ko phali bar dekh kar hi sundas ko laga ya wohi tu hai jis ka ushai intizar tha.

sundas k mamo jo kahin barson bad bal ke bahut barson bad watan wapis lote thy ab wo hamsha ke liya pakistan Aay thy wo ali ki shadi apni family mai karna chaty thy par jis main ali ki pasand ho is fasly main unho ne ali ko pori Aazadi derakhi thi wo jis sy chay ga ushai apna humsafar bana sakta hai is ki ijazat us ke waladin ki taraf sy ushai pori pori hasil thi.

waqt guzarta gaya ali sundas sy dharon baatein karta or ziyada waqt us k hamra hi guzarta.or sundas ny bhi apna tamam waqt us ke naam kar dala.wo aksar coleg bhi kam jati bal ke yun kahiya us ny coleg bhi chor diya.kuch hi dino ki ya muhabbat ya kuch hi dino ki ya kurbat muhabbat mai badal gai.sundas ny to Aay si hi duniya ke khawab dekhay thy.kahin dawey kahin vaade kahin Adopama bandy gay.

par sundas nahi janti thi.wo bilkol bhi janti thi k jab Aankhen kholy gi tu ya sapna chikna chor ho chuka hoga or zahkmon sy khon rista howa dekhi dega.dosri janib sundas kahan janti thi wo nadan is baat sy bhi bekhabar thi ke koi kitni raaton ki neend gawa kar us ki dhid ki Aarzoo main jera hai.khaty hain dor hony sy jazbon mai shidat Aati hai hassan ka bhi kuch Aay sa hi hal tha ke har pal us ki ek hi dua hoti
Aay parwadigar ek bar mujhy us sy mila dy ke mai us sy dil ka hal khydon.apni tamam raaton ka hisab mango jo us ki Aarzo mai kat gai mari muhabaat ka kuch tu sila mile.

hassan Aaksar sochta rahta ke ab wo mujhy mily tu mai us sy khydon ga mujhy tum sy muhabbat hai mujhy tum sy bepanha muhabbat hai.muhabaat bhi Aaysi ke tumhari muhabaat mai apni jaan tak lota dange.

hum teri mohabbat mein.
yoon pagal rehte hain.
hum teri mohabbat mein.
yoon pagal rehte hain.
deewane bhi hum ko deewana kehte hain.

hassan aksar sundas hi ki sochon mai khoya rahta wo ishi tarhain k sapne dekhta ushai raaton mai neend bhi na Aati kyon k wo sirf OR sirf ushi ko sochta rahta us sy dharon baatien karta rahta ushai shayad wo zindagi mai sab sy ziyada Aachi lagti thi.raat mai chand sitaron ka husan bhi ushai maan sa nazar Aata.

dosri taraf sundas apni sochon or bore wahmat sy nikal ny k liya aj kitny rooz bad coleg jane k liya tiyar hoi.hamesha ki tare hain aaj bhi coleg se wapsi par ushai hassan ko apna muntazir paya.hassan jo sundas ko dekh kar jeta tha aj kahin roz bad ushai samne pa ke jane kis Aahsas k tabe us ki Aankhon sy Aasu chalak phary ushai tu laga tha k us ny apni khamoshi mai sundas ko khodiya hai.hassan ne fasla kiya ab ushai is bhir main gum hone nahi dega hamesha ki tarhain is bar der nahi kare ga.jab sundas us k pas sy guzri tu Aaj hassan k lab khol hi gae.or usne sundas k samne bahut himmat karte howe khahi diya.

k suniya……..

magar sundas jis ny Aawaz tu suni lakin ruki nahi bina us ki taraf dekhy chalti gai.ab bharai hoi Aawaz main pher us ny kaha.

pls…….. mari baat tu suniya.!

main ap ko bahut chata hon main ap sy bahut pyar karta hon.sundas us ki baat tu sun chuki thi lakin ek lamhy ko ruki nahi kyon k wo khy chuka tha mujhai tum sy muhabbat hai us k dil k tamam jazbe hassan ne Aaya kar dale wo Aajbharam ki duniya sy nikal chuka tha kyon k wo in kuch dino main jis karb sy guzra tha ya sirf hassan hi janta tha.

wo hassan ki sab baatien sune k bad ushai kuch khany k bajay thori si herat or pher haste howe Aagy chaldi magar jane sy phaly ushai ek baat khegai…..!

tum ne kabhi apne huliya par goor kiya ya bare bare kurty ya itne ghadle melay sy kapry tum kisi jokar sy kam nahi tum ny ke sy soch liya ke muj jasi larki ke kabil ho sakty ho tum.

bas akhiri baat yahi thi…..

“tum ny ke sy soch liya ke muj jasi larki ke kabil ho sakty ho tum”

or wo wahan sy chaldi magar hassan ki Aankho sy hoti hoi barsat or us raha sy ghar tak ki musafat kitni tawil thi.
hassan tu itna masruf tha gamy rozgar mai ke wo is badalti duniya k rang o dhang apna hi na saka.par hassan k pas bas ik izat hi tu thi or jazbo ki sadaqat. Aaj koi ghari chot lagi thi.us ki muhabaat thek hi tu hai.

har rishtay mai izat sy bhar kar kuch nahi hota.

“kisi ko kisi sy muhabaat nahi ya baat Aalag”

lakin sirf isliya muhabaat nahi?

“ke kisi kapry bahut ghadle hain”
“koi jokar dikhta hai”
“kisi ke pas sy pasinay ki badbu Aati hai”
“us ke bare bare kurty hain”

kisi bhi rishtay mai izat sy bhar kar kuch nahi hota.
izaton sy barkar tu or kuch nahi hota.

chahaton ki doori bhi turna hi pharti hai,
manzilon ki kashti bhi morna hi pharti hai ,
bhoolna hi pharti hai khud sy pyare logo ko,
dil ke Aagan main nakash un ki tasveery,
kush hasin lafzon ki kuch hasin thariray,

paon jin sy jagry hon wo wafa ki zanjiry kholna hi pharti
khub surat Aankho main basne wale khawabon ko nuchna hi pharta hai
dil sy milta har rishta torna hi pharta hai
izaton sy barkar tu kuch or nahi hota

hassan soch ny laga jab sena hai zakham khanay or sahny ke liya tu tut ny ke liya sirf ek dil hi kyon Aaj koi Aaysa na tha jo hassan sy roo ny ki waja pochta us ka dard banta Aaj ki raat kahin salon par muhit lag ny lagi itni tawil ke jasy us ki sahar hi na ho.

Bahut hi door kahiin wadeyon se yeh sada aai
Ke jab tum pyaar karna tu iqraar mat karna
Ke jo iqraar karta hai usse umeed hoti hai
Usse umeed hoti hai kisi ke muskurane ki

Kisi ke muskuraane aur phir nazrein jhukane ki
Inhee jhukti hue nazroo se us ke aah bharne ki
Woh jo iqraar karta hai usse umeed hoti hai
Haan jo iqraar karta hai usse umeed hoti hai

Usse umeed hoti hai ke woh nakaam na hoga
Usse umeed hoti hai ke woh badnaam na hoga
Usse umeed hoti hai ke jo sapna us ne dekha hain
Woh sapna aik din sharminda-e- tabeer honge

Woh sapne jin mein us ne khud ko bahut masroor dekha hai
Woh sapna jis mein us ne ek hasseen chehre ko dekha hai
Woh chehra jis peh bal khaati zulfoon ka pehra hai
Woh chehra jis peh do aankhoon ka kaala rang ghehra hai

Woh chehra jis peh do hanste hue se lab hain
Hazaaroon phool baraste hain woh lab jab bolti hain
Woh lab jin se nikalte hue alfaaz jo sun le
Woh bas ulfat mein par jaye hazaaroon khowab woh ban le

Kisse kaise bataye us ke hai lehje ka assar kya
Ke jaise barsoon se pyasi kisi zameen peh baarish
Ke jaise sadeyoon se be-jaan jism per dam-e-Essa
Woh haseen aur woh khud ek chote se ghar mein rehti hain

Woh donoo choti choti batoon pe roz hansti rehti hain
Woh chota ghar ke jahaan har taraf khushiyan hi khushiyan hain
Woh chota ghar jahaan har taraf hi pyar ayyaaan hai
Yeh sapnay woh hi bunta hai jissay umeed hoti hai

Ke sapnay aik din sharminda-e- tabeer bhi honge
Magar aisa na ho tu phir
Agar aisa na ho tu phir

Woh sapnay toot jaayain tau
Woh gar nakaam ho jaaye tau
Woh lab na muskuraayain tau
Agar aisa na ho tu phir

Agar aisa na ho tu phir bahut takleef hoti hai
So jab tum pyaar karna tu kabhi iqraar mat karna
Ke jo iqraar karta hai ussay umeed hoti hai
Ke jo iqraar karta hai ussay takleef hoti hai…

wahain sundas ali k khawabon mai gom thi.us hai tu ya bhi yaad na tha ke Aaj us ny kisi ki zaat ka kitna bhara mazaq uraya wo kesy kisi dard ki shidadt sy Aashna hoti.wo tu ali ki muhabaat ke sarahab mai jee rahi thi har guzarti sham or dhalty suraj ke sat us ke naam ka diya jala kar apne dil ki taak ki oud sy jankty hasin lamho or Aany waly kal ke khawab sajati wo sirf un wadon ko yaad karti jo ali ny kuch din us ke ghar tahar kar ussy kiya thy lakin ali bhi kuch roz ka khy kar apny walid ke sat apne mamo ke ghar chaly gaya.

ab kuch roz sy sundas coleg se wapic Aati tu wohi mor us kitna suna sa lagta dor dor tak ushai kahin bhi hassan nazar na Aata. go k log tu bahut hoty lakin itny logon ki mujodgi mai bhi.sirf ek shakhs Aaysa hai jo phaly tha tu lagta tha ke sab kuch mujod hai lakin Aaj ek wo shakhs hi tu nahi sab kuch ushi tarhain sy hai rasta bhi wohi hai rash bhi ushi tarhain sy hai lakin wo do nighain kahin par nazar nahi Aati jo Aaksar us ka intizar karti rahti Aaj wo hassan us rah par kahin mujod na tha jo hamesha wahain muntazir rahta kitna suna sa lagta dor dor tak koi sadaa ya koi Aahat us ke bagar nahi or nahi us rasty par kisi ki nigahain ab us ka us tarhain sy hisar karti.jab wo samny tha tu sundas ny uske hony us ke Aahsas ko dil mai jaga na di ab us raah par koi nahi tu kyon us ko sochti pher dil mai uthny waly sawalon or us ke khayalat ko zahan sy jhatak dati

magar sab kuch insan k apne bas mai tu nahi hota guo k us sy muhabaat nahi thi lakin ek shakhs tu tha jis k dil mai is ki Aahmiyat tu thi bahut na sahi bahut kam na sahi lakin bahut kam sy bahut kam Aahsas tu us ka pher bhi us dil mai rah ga. zinda rah ga

Dil se tera khayal na jaye to kya karun,
Tu hi bata tu yaad aaye to kya karun,

Hasrat yehi hai tujhe dekh lun magar,
kismat wo lamha na laye to kya karun.

Aaj kahin dino baad ali or mamo wapis Aary thy wo kitni kush thi kabhi sochti k ali Aay ga tu wo us k samne tak na jae gi ya us par gusa kary gi rout jae gi ke us ny itny dino mai ek bar bhi yaad nahi kiya kasi muhabaat thi us ki kia ek bar bhi ali ko mari yaad na Aai us ny ya din k sy guzarypar ali ko samny paa kar jaise sary shikway bhool gai.sundas jis walihana nazron sy ali ko tak rahi thi.ali na sirf ek sar sari si nazar dal kar chera jukhaliya or thakawat ka bahana bana kar Apne room mai chala gaya sundas ko ya sab dekhny ko mila tu ushai bahut nagawar guzra ke itne dino ki dori ke bad wo ishai itni Aaj Nebiyat sy kyon kar mila.

Toot jaye na bharam hont hilaon kaise,
Hal jaisa bhi ho logon ko sunaon kaise,
tari surat hi mari Aankhon ka sarmaya hai,
tare cheray sy nighaon ko hataon kaise,
wo rulata hai mujhe jee bhar ke rulae,
mari Aankhyan hai,mai us ko rulaaon keise,
Khushk aankhen se bhi ashkon ki mehak aati hai,
Mai us k gham ko zamane se chupaon kaise,
Phool hota to mai us k dar pe saja bhi deta,
Zakham le k uski dehleez pe jaon kaise,

sundas ny socha sham ko ali sy baat ki jai duphar k khany par ali nahi Aaya. or sundas ke mamo ny sab ko ek kush khabri sunai……!

kisi ki kush khabri kisi ki kushi kisi ke liya gamm hota hai hamri zindagi main bhi bahut bari kushi ban kar Aany wali shay bahut bara gamm band kar ruksat bhi ho jati hai.

kush khabri kia sunani thi mamo kahne lage ke ali ny shadi ka fasla karliya hai ya sun kar sab ke chary kushi sy khil uthy sundas ki mama ny jab bahi sy pucha ke kon hai wo jo hamary ali ka intikhab hai apni mama ki ya baat sun kar sundas apni dharkano or kisi Aanjani si kushi ki kafiyat sy wahain sy uth kar jany lagi kuch kadam hi chali thi ke us ke kadam tahar gay kyon ke us ki samaton sy jo naam takraya wo uska tu na tha wo tu sundas ki czn hina ka tha.mamo ny kaha ke ali ny hina sy shadi karne ka fasla kiya hai izhar kiya hai tu maine un ka rishta tay kardiya.sundas ki mama khud bahut kush hoi.wo sundas ke jazbon sy shayad ab talak na wakif thi Aanjan thi.

Aab sudas raat ka intizar karne lagi apne Aansuon ko Zabt kiya ali k room mai chaly gai or ali ki neghao mai apne liya wohi pyar dhona chaha jo Aaj sy kuch dino phaly tak us ka maan tha.

magar Aafsos wahain AajNebiyat ke saaye ab bhi us ka intizar kare thy.
sundas ne pucha ali tum tu mujse pyar karte thy tu hine kase tumhari zindagi mai Agi.is se phaly ke sudas kuch or khati ali ne kaha sirf itna jan lo hamare darmiyan jo kuch tha wo sirf unsiyat thi us ka Aahsas mujhe jab howa jab maine hine ko dekha jab maine usse baatine ki tu wo larki nahi jaise muj jaisa ek Aaysa Aahsas hai jis ki mujhe sirf o sirf talash thi wo mari such ka mehwar hai or mari such ka mehwir tu sirf o sirf hine hai wohi tu hai jise mai suchta tha wohi tu hai jise mai chata tha wohi tu hai jis ki mai ne hamesha khawaish ki thi ek lamhe ko mujko yun laga tha jaise wo tum ho lakin shayad mai galat tha balke nahi main sara ser galat tha tum mari bahut Aachi dost ho.lakin wo jo mari duniya ki shazhadi hai jo mallika hai jo pari hai wo tu sirf hine hai sundas ko Aaj Aapne ghar ke sanaty mahsus howe wo diya jo jala hi nahi tha jise wo dil ke taek par sajana chati thi wo uska tha hi nahi magar itne duhk main ushai Aaj koi dard mahsus na howa us ki such mai jo chera ubrah wo tu hassan ka tha us ka dil us pal mai giraftar tha jab ishi tarhai usne kisi ka dil tora tha or wo ek lafz na kah saka tha us ki bhegi Aankho mai kitni iltijain kitne sawal thy wo kyon hassan ke aansoo ka jawab Aaj khud sy mangne lagi ushai kis ne haq diya tha ke wo kisi ke jazbon ka mazaq banay wo bhol kar bhi hassan ki bhegi Aankhon ko nahi bhola parahi thi Aaj ushai bahut shiddat sy koi yaad Aaya ek Aaysa shakhs jis ki Aankho mai bahut Aansoo bharne lage thy motiyon ki tarhain chamak ne lagte thy jis ne jate waqt ek lafz bhi na kaha Aaj roota howa wohi shakhs bahut yaad Aaya

Aj rota hua 1 shakhs bahut yaad aaya,
Achcha guzra hua kuch waqt bahut yaad aaya,
meri aankhon k har ashk pe rone wala,
aaj ye aankh jab royi to bohut yaad aaya
Jo mere dard ko seene mein chupa leta tha,
Aj jab dard hua muj ko to bahut yaad aaya,
jo meri aankh mai kajal ki tarah rehta tha,
aaj kajal jo lagaya to bohut yaad aaya,
jo mere dil ke tha qareeb faqat,
ussi ko aaj jab dil ne bhulaya to bohut yaad aaya…

sundas kahan dhoondti ab us joker ko ab us shakhs ko jis ke kapry bahut ghadle thy bahut melay thy bahut bare bare kurty thy jo joker tha jis ki wafain sachi thi ab us rah par tu koi uska muntazar na tha.

kuch hi rooz main ali ne apni naayi zindagi ka Aagaz kiya

sundas Ali ke naam ke Aansoo bahana nahi chati thi kyon ke wo apna ek bhi jazba us ke naam na karti ya shaid us ke naam karna nahi chati jis ki nighaon ne muhabaat or unsiyat ke faraq main tamiz na ki ab lakh jhonke khushboo ka paigam late wo to us kurbat ki talabgar thi jis mai sachai or muhabaat ki mehak thi ushi wajod ki jis ke kurb sy uthne wali mehak usne badboo jan kar raad kardiya tha wo to banawat se Aanjan tha.

ab sundas ki zindagi mai parne wali silwate kon dor karta kon un Oorak ki tharir samjhata jin Oorak ko sundas ny khud apni zindagi se phar kar hawaon ke supard kardiya.wo kisi ke dil ke tukde kar ke uraya rahi thi shaid duniya walon ko hawaon ka ruhk bata rahi thi.sudas ko Aahsas howa ke us ke dil ke karib tu hassan ne jaga banai thi tabhi tu us ke kho jaane par uski nigahyen uski mutalashi thi.

kabhi kabhi koi Aapna na hokar bhi kitna apna sa ho jata hai Aaj wo hassan ke kho jane ka Aahsas or muhabaat ki kirchiyon ko chunte chunte apni ungliyon ke pore zakhmi kar bethi thi kahin rat jagon ko Aankho mai liya rayt ke gharonde banai bathi thi wo aj pher kisi Aahat par ekdum se piche mur kar dekhne lagti.pher kisi rasty par koi chalta kahin koi Aahat koi Aawaz Aati wo guzarte guzarte mur kar dekhti k shayad wo chera wo mutalashi Aankhy muntazri nighain pher se nazar Aajai ….!

Hazar rahein mud ke dekhin
Kahin se koi sada na aayi
Badi wafa se nibhayi tumne
Hamari thodi si bewafai

Jahan se tum mod mud gaye the
Ye mod ab hi wahin pade hain
Hum apne pairon mein jaane kitne
Bhanwar lapete hue khade hain

Badi wafa se nibhayi tumne
Hamari thodi si bewafai

Hazar rahein mud ke dekhim
Kahin se koi sada na aayi
Badi wafa se nibhayi tumne
Hamari thodi si bewafai

Badi wafa se nibhayi tumne
Hamari thodi si bewafai
do pal ki kushiyan thi ek pal tha kushi ka.
pher ek pal main itne dard mil gai shikwa zindagi se nahi shikwa us ek pal se tha jo tha tu bahut hasin lakin thara bhi nahi us ek pal ne kitni bagawat ki us ek pal ne kitna zulm kiya us ek pal mai zindagi kia hogi us ek pal ne zindagi ne sab kuch cheen liya us ek pal ne zindagi ki sari kushiyan cheen li……….!

Ek Pal Mein Hi Apni Zindagi Kya Se Kya Ho Gayi
Tere Mere Rishte Ko Jaan Kiski Nazar Lag Gayi
Tera Maasoom Chehra Yaad Aayega Har Pal Mujhe

yakinan wo masoom sa chehra wo masoom si nighain wo namnak nighain jin mai kuch Aansoo tearte thy jin ki parwa tak na ki…..!

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बारिश में भीगने की वजह से उसके चूचुक टाइट हो गये

यह कहानी मेरी और मेरी पड़ोस में रहने वाली डॉक्टर कीर्ति की है। बात दो महीने पुरानी है। मैं कंपनी के काम से जर्मनी जाकर वापिस आया था।कंपनी गुड़गाँव में थी, इसलिए मैंने वापिस आकर वहीं पर एक किराए का बड़ा सा फ्लैट ले लिया क्योंकि कंपनी से पैसा तो मिलता ही था। कंपनी ने गाड़ी भी दे रखी है तो कोई दिक्कत ही नहीं होती थी।
दोस्तों के साथ घूमना, बार में जाना यही सब मस्ती से चलता है। सैक्स-चैट करना मुझे खूब पसंद है।
कहानी पर आता हूँ। मई की बात है, मैं सुबह कंपनी जाता और शाम 5 बजे तक वापिस आ जाता। मेरे नीचे वाले फ्लैट में एक दंपति रहते थे। लड़के का नाम आयुष था, काम कुछ नहीं बस ज़मीन बेच कर दारू में पैसा उड़ाता था। चूंकि बाप की ज़मीन काफ़ी थी, आधे वक़्त घर ही नहीं आता था।
उसकी बीवी मस्त माल थी। वैसे थी वो डॉक्टर लेकिन उसके घर वालों ने काम करने से मना कर रखा था। उनका 5 साल का एक बेटा था। मेरे ही ऑफिस जाने के वक़्त पर ही रोज़ स्कूल का समय होता तो कीर्ति और उसके बेटे से रोज़ हाय-हैलो होने लगी।
धीरे-धीरे उनका बेटा मेरे यहाँ खेलने आ जाता मेरा भी टाइम पास हो जाता था। वैसे कीर्ति भी उसे मेरे यहाँ भेज देती थी क्योंकि उसकी और उसके पति की रोज़ लड़ाई होती थी। झगड़े के बाद उसका पति अक्सर बाहर ही चला जाता था और रात-रात भर वापिस नहीं आता था।
जब वो अपने बेटे को बुलाने आती तो मैं उसके साथ ज़रा मज़ाक कर लेता, वो भी मुस्कुरा कर चली जाती थी। धीरे-धीरे हमारी बात होने लगी। अब वो अक्सर कॉफी पीने बुला लेती थी क्योंकि उसके पति देव आते ही नशे में थे या नहीं ही आते थे।
कीर्ति के बारे में बता दूँ, ग़ज़ब माल है, 36-25-28 का फिगर होगा, जब भी चलती तो मटकते चूतड़ देखकर किसी का भी लंड खड़ा कर दे। अक्सर बिना बाजू का सूट सलवार पहनती, उसके दूध उभर आने को उत्सुक रहते थे।
मैं उसे हमेशा निहारता रहता था, वो भी कातिल मुस्कान देकर निकल जाती थी। धीरे-धीरे हम काफ़ी खुल कर बातें करने लगे।
एक दिन मैं अपनी गाड़ी से आ रहा था, बरसात हो रही थी, मैंने देखा कि कीर्ति अपने बेटे के साथ स्टैंड पर खड़ी थी। बारिश के कारण वो भीग गई थी।
मैंने अपनी गाड़ी रोकी और आवाज़ देकर उन्हें अंदर आने को कहा। पहले तो वो थोड़ा शरमाई फिर मेरे दोबारा कहने पर अंदर आ गई। वो मेरे बगल वाली सीट पर आ गई। कसम से क्या कामुक लग रही थी।
बारिश में भीगने की वजह से उसके चूचुक टाइट हो गये थे और उनका उभार साफ नज़र आ रहे थे। नीचे सलवार से उसकी काली पैंटी भी दिख रही थी। बड़ी मुश्किल से उस वक़्त काबू किया लेकिन लंड खड़ा होने लगा था।
कीर्ति भी सब जानती थी। वैसे सब लड़कियों को पता होता है कि क्या चल रहा है बस एक्टिंग ऐसे करेंगी कि जैसे कुछ ना पता हो। मैं गाड़ी को मैं धीरे-धीरे चला रहा था ताकि आज उसे अच्छी तरह से देख सकूँ।
उसने भी अपनी मोटी जाँघ को दूसरे पर रख लिया और मुझे अब उसकी पैंटी एकदम साफ़ दिख रही थी। मैं समझ गया कि वो जानबूझ कर ऐसा कर रही है। मैं भी स्माइल देकर गाड़ी चलाने लगा।
मैं बार-बार गियर बदलने के बहाने उसकी जाँघ को छू रहा था। उसने भी कोई नाराज़गी नहीं दिखाई। फिर तो पूरे रास्ते मैंने उसकी जाँघें छू-छू कर मज़े लिए। घर आकर उसने मुझे बोला कि कॉफी पीकर ही जाना। मैं भी अपने घर नहीं जाना चाहता था।
वो कपड़े बदलने का बोलकर एक स्माइल पास करके गई। मैं समझ गया कि आज मौका है और मौसम भी। बेटे को उसने खाना खिला कर दूसरे कमरे में पहले ही भेज दिया था। जब तक वो चेंज करके आती, मैं उसके मोबाइल की वेब-हिस्टरी देखने लगा तो पाया की उसमें अन्तर्वासना की खूब कहानियाँ थीं।
मैं सोफे पर बैठा था कि एकदम से उसने मुझे पीछे से स्पर्श किया।
मैं तो पागल ही हो गया था जैसे ही मुड़ा दोस्तों ! ‘अहह’ क्या बोलूँ उस हुस्न को… दोस्तो, गुलाबी मैक्सी में देख कर बिल्कुल परी नज़र आ रही थी, उसमें से उसके कबूतर बाहर आज़ाद हो कर उड़ने को बेताब थे। एकदम गोरा हुस्न जैसे मलाई लगाई हो।
मैं बस उसे देखता ही जा रहा था कि उसने मुझे टोका ‘कॉफी तो ले लो।’
मैंने जल्दी से उसका मोबाइल रखा, लेकिन उसने देख लिया था। कॉफी लेते वक़्त उसके हाथ का स्पर्श फिर हुआ और वो मुस्कुरा दी, वो बोली- विदेश रह कर आए हो, गर्लफ्रेंड तो ज़रूर रही होगी।”
मैंने कहा- हाँ थी तो ! लेकिन आप जितनी खूबसूरत नहीं।
वो शरमा गई।
मैंने कहा- आपकी भी शादी के बाद कुछ इच्छाएँ तो होती होगीं, लेकिन आप अकेले कैसे रह लेती हैं?
वो कुछ नहीं बोली बस सिर हिला कर हामी भर दी।
मैंने फिर कहा- सिर्फ़ मोबाइल पर पॉर्न-साइट्स देख कर आपकी इच्छा पूरी हो जाती है?
वो एकदम झेंप गई।
“तुमने मेरा मोबाइल देखा?”
मैं बोला- हाँ।
उसकी आँखों से आँसू आने लगे।
वो बोली- तुम तो जानते ही हो मेरी मजबूरी ! बेटे की वजह से छोड़ भी नहीं सकती अपने पति को।
मैंने उसका हाथ थाम लिया और वो रोते-रोते मेरे गले से लिपट गई। मैंने भी उसे कस कर पकड़ लिया। मैं समझ गया कि यही मौका है, और उसके होंठ से अपने होंठ लगा कर कस के चूमने लगा।
उसने एक बार हटने की कोशिश की मगर मैंने उसे कस कर पकड़ा हुआ था, थोड़े से विरोध के बाद वो भी मेरा साथ देने लगी।
मैंने बोला- आज से मैं तुमको तुम्हारे पति की कमी महसूस नहीं होने दूँगा और तुम्हें खूब प्यार दूँगा।
इतना सुनते ही वो और ज़ोर से मेरे होंठ काटने लगी। मैं भी उसका साथ देने लगा और खूब ज़ोर से उसके होंठों से रस पीने लगा।
वो मुझे लेकर अंदर आई और उसने मुझे बाँहों में भर लिया और बिना कुछ कहे चूमने लगी, कभी मेरे गालों को चूम रही थी और कभी गले को। इस सब के बीच मैं चूमते हुए उसके स्तन तक भी चला जाता था। उसने मुझे बाहों में जकड़ा हुआ था जिससे मेरा सीना उसके स्तन पर टकरा रहा था।
उसने मेरा दायाँ हाथ अपने सीने की बाईं गोलाई पर रख दिया और बोली- मसल दो इसको।
मैं कस कर मसलने लगा। वो आहें भरने लगी। मैं समझ गया कि वो बहुत प्यासी है। वो मेरे ऊपर ढेर हो गई और वो जैसे ही ऊपर आई तो मैंने भी दोनों हाथों का सहारा दे दिया।
मैं भी उसके साथ चुम्बनों का मजा ले रहा था। उसने जल्दी से मेरी शर्ट खोल दी। उससे बिल्कुल नहीं रुका जा रहा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने कहा- जान, आज मैं सिर्फ़ तुम्हारा हूँ। आज मैं तुम्हारी बरसों की प्यास मिटा के ही रहूँगा।
मैंने जल्दी से उसकी मैक्सी उसके दूधिया तन से अलग कर दी। उसने काले रंग की पैन्टी और ब्रा पहन रखी थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी गोद में लिटा लिया। उसके बदन की महक ने मुझे मदहोश कर दिया।
हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे और कभी मैं कीर्ति की जीभ चूस रहा था और कभी वो मेरी। दूसरे हाथ से मैंने उसका का एक स्तन दबाना शुरू कर दिया जिससे उसे और मजा आने लगा।
वो आहें भरने लगी ‘आह आहा हहाहा !’
मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया। मेरा लण्ड पैन्ट के अंदर था पर पूरी तरह खड़ा होकर कीर्ति की फैली हुई टाँगों के बीच चूत पर टकरा रहा था और वो भी इस सब का पूरा मजा ले रही थी।
मैं उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा और उसने भी मस्ती में आँखें बन्द कर लीं और मेरा साथ देने लगी। एक-एक करके मैं उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा।
मैंने अपनी पैन्ट उतार दी। अपने हाथ पीछे कर के उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसे उतार कर फ़ेंक दिया, और फिर से उसके होठों को चूसने लगा।
मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी गीली हो चुकी चूत को चूम लिया। उसमें एक मदमस्त कर देने वाली गंध आ रही थी। मैंने उसकी चूत में मेरा चेहरा ही गड़ा दिया था। मैं अपने हाथ से उसकी दोनों चिकनी टाँगों पर हाथ फेर रहा था, मैं उसकी चिकनी टाँगों पर से हाथ ही नहीं हटा पा रहा था।
मैं थोड़ा और ऊपर आया और उसकी नाभि में जीभ चलाने लगा, वो ‘आहें’ भरने लगी। मेरा लण्ड नीचे दब कर परेशान था। मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और उसकी पैन्टी उतार दी। चूत अनावृत थी और उससे थोड़ा पानी निकल रहा था। मैंने उसके उभरे भाग पर हाथ रखा तो उसने दोनों पैर भींच लिए और उसके मुँह से आह निकल गई- सीईईए !
मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने खड़े होकर अण्डरवीयर भी उतार दी।
मैंने उसकी चूत को जोर-जोर से चाटने लगा और उसने मेरे सिर को अपनी जाँघों में दबा रखा था और दबी आवाज़ में जोर जोर से साँसें भर रही थी।
वो अपना सिर इधर-उधर हिलाते हुए ‘ओह..आह’ की आवाजें निकालने लगी।
इस तरह से मैंने उसे थोड़ी ही देर चूसा होगा कि उसका बदन अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी।
वो काफी देर तक झटके मार-मार कर झड़ती रही और मैं उसे चूसता रहा। कीर्ति ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी और देखते ही देखते उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।
उसका इस तरह से लण्ड चूसना मुझे बहुत आनन्द दे रहा था। वो मेरा लण्ड चूसती रही और मैं उसके बालों को सहलाता रहा।उसके मुँह की गर्मी से लण्ड और गर्म हो गया था।
मुझे लगा मैं छूटने वाला हूँ तो मैंने उसे कहा- कीर्ति मेरा निकलने को है !
वो बोली- आज तो तुम सारा माल मेरे गले मे ही उतार दो।
मैंने भी उसे मायूस नहीं किया और सारा वीर्य उसके गले में उतार दिया, वो सारा चट कर गई।
अब न तो मुझसे रुका जा रहा था और न ही उससे।
कीर्ति बोली- राहुल, अब बस घुसा दो अपना लण्ड, अब और इंतज़ार नहीं होता।
चूत पानी से बिल्कुल गीली थी और चुदने को तैयार थी, मैंने उसकी टाँगें फैला दी और अपना लण्ड उसकी गीली चूत पर रखा और रगड़ने लगा, कीर्ति उत्तेजित होने लगी, उसने मुँह से “आ ह… आ…सी…सी…आ..” करते हुए अपनी टाँगों को और फैला दिया। मैंने कमर के नीचे एक तकिया रखकर चूत को और ऊपर को उठा दिया।
कीर्ति मस्त आवाज़ में बोली- आह ! क्या कर रहे हो राहुल?
मैंने जवाब दिया- तुम्हें प्यार कर रहा हूँ मेरी जान, और फिर लंड रगड़ने लगा।
कीर्ति अपनी कमर को ऊपर उठाकर लण्ड को चूत में निगल लेना चाह रही थी, वह हाँफ रही थी, “प्लीज़… डालो… न..आ… आ..ह… उ…इ..इ..ओं.. अब नहीं रुका जाता..आ… आ..ह..”
मैंने लण्ड चूत पर रखकर उसके कन्धे पकड़ लिये और जोर से झटका मारा। एक बार में ही लण्ड चूत को आधे से ज्यादा पार कर गया।
वो चिल्लाई “ऊई… ई… ई… माँ… आ… अ…”
मैं उसके स्तनों को चूसने-चाटने और मसलने लगा, धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा और फिर एक और ज़ोर के झटके के साथ पूरा लंड अंदर घुसा दिया और मैंने स्पीड बढ़ा दी।
कीर्ति बोली- जानू, बहुत अच्छा लग रहा है ! जोर-जोर से करो न !
दस मिनट तक इसी तरह तेज धक्कों के बाद वो शांत हो गई।
मैं भी थोड़े और धक्के और लगाने के बाद चरम पर पहुँच गया और पूरा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया। वो शांत होकर अब मेरे ऊपर आ गई और उसने अपनी टाँगें मेरी टाँगों के ऊपर रख दी और हाथ मेरे हाथों के ऊपर। हम दोनों उसी तरह थोड़ी देर पड़े रहे।
मैं उसे चूमने लगा और वो मुझे। फिर हम दोनो ने थोड़ा आराम करके फिर अपनी चुदाई का दूसरा चक्र शुरू किया और रात भर अपने सहवास में मस्त रहे। बाद में मैंने उसकी गाण्ड भी मारी।
अब मैं ऐसी प्यासी औरतों के लिए हमेशा तैयार रहता हूँ। कभी भी खुल कर अपनी बात मुझसे करने के लिए आपके विचारों का स्वागत है।

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मेरी मकानमालकिन और उसकी सहेली

मेरी मकानमालकिन और उसकी सहेली मुझसे चुदवाती थी । दोनों को एकदम सेफ जगह और मुफ्त का मर्द मिल गया था और मुझे किराए में रियायत।
मकानमालकिन मुझे खाना खिलाने लगी और पहले किरायेदार से पेईंग गेस्ट बनाया फिर बहाने से छूने लगी,सटने लगी, खाना परोसते समय इतना झुकती कि गाल से गाल छू जाता, फिर एक दिन मेरा लंड सहला दिया। फिर मैं उसकी चुम्मी लेने लगा, चूचियां दबाने लगा। फिर मैं साडी के ऊपर से ही उसकी बूर मसल दिया। अब वो मेरे नहाने के वक्त बिना दरवाजे के बाथरूम के सामने बैठकर बर्तन मांजने लगती और मैं अंडरवियर के अन्दर साबुन लगाता तो कहती कि सारा देह खोलकर साफ़ करते हो उसको भी खोलकर अच्छे से साफ़ किया करो. फिर मैं खड़े लंड को कच्छी से निकालकर देर तक झाग मलता और वो इत्मीनान से देखकर आह भरती। फिर मैं लपककर उसे पीछे से पकड़ लेता, उसके बोबे दबाता और उसकी पेटीकोट के अन्दर हाथ डालकर बुर को मसल देता। मेरे गीले बदन से वह आधी भींग जाती। फिर मैं उसके सामने सड़का मारता या उसे बाथरूम में खींचकर उससे सड़का मरवाता उसके बाद वो नहाती। फिर वो रात में धीरे से मेरे बिस्तर में आने लगी और पत्नी की तरह हाथ पाँव दबाने लगी मालिश करने लगी और चुदवाने लगी।
उसकी सहेली भी मुझे देखकर ओंठ चाटने लगी। और धीरे धीरे सटने सटाने लगी। एक दिन मैं बेफिक्र होकर रोज की तरह से अपने लंड में तेल लगा रहा था। मकानमालकिन खुद चाय लेकर आने की बजाय जानबूझकर उसी समय सहेली से चाय भिजवाई। उसकी सहेली चाय रखते हुए बोली- अकेले क्यों इतनी मेहनत करते है किसी की मदद ले लिया कीजिये न । मैं चुनक गया और वह इतना कहकर भागने लगी । फिर उसी हालत में मैंने उसको दबोच लिया। और लंड उसकी कूल्हों के बिच दबाते हुए कहा- आओ मदद करो न। मैंने उसके बोबे मसल दिए और सलवार के अन्दर हाथ डालकर उसकी ……. क्या …….? हाँ, उसकी बुर्र्र्र्र्र भी मसल दिया। बस फिर दिन से शुरू हो गया …..मेरे तो मजे ही मजे थे। दोनों एक साथ मेरे बिस्तर में आने लगीं ……..